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एमपेम्बा प्रभाव को समझने के लिए भारत ने बनाया पहला सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन (India creates first supercomputer simulation to understand Mpemba effect) | UPSC

India creates first supercomputer simulation to understand Mpemba effect

India creates first supercomputer simulation to understand Mpemba effect

संदर्भ:

भारत के वैज्ञानिकों ने हाल ही में ‘एमपेम्बा प्रभाव’ (Mpemba Effect) को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय शोधकर्ताओं ने पहली बार इस जटिल भौतिक घटना का विश्लेषण करने के लिए एक सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन विकसित किया है।

एमपेम्बा प्रभाव क्या है? 

  • एमपेम्बा प्रभाव एक ऐसी भौतिक घटना है जिसमें गर्म पानी, ठंडे पानी की तुलना में तेजी से जमता है। 
  • यह सामान्य तर्क के विपरीत है, क्योंकि सामान्यतः माना जाता है कि गर्म पानी को जमने से पहले ठंडे पानी के तापमान तक पहुँचना होगा, जिसमें अधिक समय लगना चाहिए। 
  • इस घटना का उल्लेख अरस्तू और रेने डेसकार्टेस जैसे दार्शनिकों ने भी किया था, लेकिन आधुनिक युग में 1960 के दशक में तंजानिया के छात्र इरास्तो एमपेम्बा ने इसकी पुनः व्याख्या की, जिनके नाम पर इसका नाम एमपेम्बा प्रभाव रखा गया।

यह प्रभाव क्यों होता है?

  • हाइड्रोजन बॉन्डिंग: गर्म पानी में हाइड्रोजन बंध खिंच जाते हैं, जिससे पानी के अणु अधिक ऊर्जा संचित करते हैं। जब इसे ठंडा किया जाता है, तो ये बंध तेजी से ऊर्जा मुक्त करते हैं।
  • वाष्पीकरण (Evaporation): गर्म पानी तेजी से वाष्पित होता है, जिससे उसका द्रव्यमान (Mass) कम हो जाता है और बचे हुए पानी को जमने में कम समय लगता है।
  • संवहन धाराएं (Convection Currents): गर्म पानी में संवहन धाराएं अधिक सक्रिय होती हैं, जो ऊष्मा के संचरण को तेज करती हैं।
  • गुलित गैसें (Dissolved Gases): ठंडे पानी में अधिक गैसें घुली होती हैं, जो जमने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं। गर्म करने पर ये गैसें बाहर निकल जाती हैं।

भारतीय वैज्ञानिकों का सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन:

    • शोध संस्थान: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के शोधकर्ताओं ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए पहल की। उनका उद्देश्य बर्फ निर्माण का एक सटीक सिमुलेशन विकसित करना था जो इस प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शा सके। 
    • प्रयुक्त तकनीक: शोधकर्ताओं ने इस जटिल घटना की बारीकियों को समझने के लिए सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया। आणविक गतिकी सिमुलेशन (molecular dynamics simulations) के माध्यम से, वे पानी के अणुओं के व्यवहार का अध्ययन करने में सक्षम हुए क्योंकि वे विभिन्न प्रारंभिक तापमानों से ठंडा हो रहे थे।

प्रमुख निष्कर्ष

    • प्रारंभिक स्थितियाँ: सिमुलेशन से यह सिद्ध हुआ कि पानी का “प्रारंभिक तापमान” ही एकमात्र कारक नहीं है, बल्कि उस समय पानी के अणुओं की “अवस्था” (State) भी महत्वपूर्ण है।
    • अन्य प्रभाव: सिमुलेशन से यह सिद्ध हुआ कि यह प्रभाव केवल पानी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रणालियों में भी द्रव से ठोस में संक्रमण के दौरान हो सकता है।
    • अंतर्निहित तंत्र: सिमुलेशन में पाया गया कि गर्म पानी में हाइड्रोजन बॉन्डिंग की स्थिति ठंडे पानी से भिन्न होती है, जिससे कुछ विशेष परिस्थितियों में क्रिस्टलीकरण तेजी से होता है।

इसका महत्व: 

  • बेहतर शीतलन रणनीतियाँ: रेफ्रिजरेशन और थर्मल इंजीनियरिंग में नई और अधिक कुशल शीतलन विधियों को परिभाषित करने में मदद मिल सकती है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स में थर्मल नियंत्रण: अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बेहतर थर्मल नियंत्रण के लिए नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है।
  • सामग्री विज्ञान (Material Science): अचानक तापमान परिवर्तन के कारण सामग्रियों के relaxation जैसी “गैर-संतुलन घटनाओं” (out-of-equilibrium phenomena) को समझने में मदद मिल सकती है।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): भारत का यह शोध ‘नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ की क्षमताओं को भी दर्शाता है, जिसके तहत C-DAC और IISc जैसे संस्थान सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हैं।

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