Haryana plans to launch country first hydrogen-powered train

संदर्भ:
हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का शुभारंभ होने जा रहा है। यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जल्द ही इसके लिए परीक्षण और परिचालन का परीक्षण किया जाएगा।
देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन:
- भारतीय रेलवे ने अपनी ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को विकसित किया है।
- यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत (Jind-Sonipat) रेल खंड पर चलाई जाएगी, जिसकी दूरी लगभग 89 किलोमीटर है।
- यह ट्रेन हाइड्रोजन ईंधन सेल का उपयोग करती है। यह ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से बिजली पैदा करते हैं, जिससे ट्रेन चलती है।
- इस प्रक्रिया में उत्सर्जन के रूप में केवल जल वाष्प (Water Vapor) निकलता है, जिससे यह पूरी तरह से शून्य-उत्सर्जन तकनीक है।
- इस ट्रेन के संचालन के लिए जिंद में 3,000 किलोग्राम भंडारण क्षमता वाला एक हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया गया है। जिसे 11 केवी की स्थिर विद्युत आपूर्ति से संचालित किया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेन की कार्यप्रणाली:
- हाइड्रोजन ट्रेनें विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया (Electro-chemical Reaction) पर आधारित होती हैं।
- इसमें ट्रेन की छत पर हाइड्रोजन टैंक स्थापित किए जाते हैं। इन टैंकों से हाइड्रोजन गैस को ‘ईंधन सेल’ में भेजा जाता है। इस सेल में हाइड्रोजन का संपर्क वायुमंडल की ऑक्सीजन के साथ कराया जाता है।
- ईंधन सेल के भीतर, हाइड्रोजन अणु एक एनोड पर प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में विभाजित हो जाते हैं। इलेक्ट्रॉन एक बाहरी सर्किट के माध्यम से प्रवाहित होते हैं, जिससे विद्युत धारा उत्पन्न होती है। यह बिजली सीधे ट्रेन की कर्षण मोटर (Traction Motor) को चलाती है।
- इन ट्रेनों में ‘लिथियम-आयन’ बैटरी का एक हाइब्रिड सिस्टम होता है। जब ट्रेन को अतिरिक्त शक्ति की आवश्यकता होती है तो बैटरी बैकअप प्रदान करती है।
- इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कोई जहरीली गैस नहीं निकलती। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलन से केवल जल (H₂O) और ऊष्मा (Heat) उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं।
महत्व:
- डीजल पर निर्भरता कम करना: भारतीय रेलवे प्रतिवर्ष भारी मात्रा में डीजल का उपयोग करता है। हाइड्रोजन ट्रेनें आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करेंगी।
- जलवायु प्रतिबद्धता: भारत ने COP26 में वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ का लक्ष्य रखा है। रेलवे ने 2030 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन एमिटर’ बनने का लक्ष्य रखा है, जिसमें यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- कम शोर प्रदूषण: डीजल इंजन की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेनें बहुत कम शोर करती हैं, जिससे यात्रा का अनुभव बेहतर होता है।
