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नागौरी अश्वगंधा को मिला GI टैग (Nagauri Ashwagandha gets GI tag) | UPSC Preparation

Nagauri Ashwagandha gets GI tag

Nagauri Ashwagandha gets GI tag

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र की प्रसिद्ध ‘नागौरी अश्वगंधा’ को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) टैग प्रदान किया। 

  • यह राजस्थान का 22वां GI टैग प्राप्त उत्पाद है। 
  • सोजत की मेहंदी के बाद, यह राजस्थान का दूसरा प्रमुख कृषि उत्पाद है जिसे GI टैग मिला है।

अश्वगंधा:

  • अश्वगंधा (Withania somnifera) एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में ‘इंडियन जिनसेंग’ और ‘औषधियों की रानी’ कहा जाता है। 
  • इसके लिए 20°C से 35°C के बीच का तापमान आदर्श होता है।
  • यह शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु का पौधा है। इसे सालाना 500-750 मिमी वर्षा की आवश्यकता होती है। कटाई के समय शुष्क मौसम अनिवार्य है।
  • बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, जिसका pH मान 7.5 से 8.0 हो, इसके लिए सर्वोत्तम है। 

नागौरी अश्वगंधा की विशेषताएं:

  • जड़ की गुणवत्ता: इसकी जड़ें लंबी, मोटी और अधिक मजबूत होती हैं, जिनमें औषधीय ‘अल्कलॉइड्स’ (alkaloids) की मात्रा उच्च होती है।
  • बेरीज (Berries): इसके फल गहरे चमकदार लाल रंग के होते हैं, जो इसकी उच्च गुणवत्ता का सूचक माने जाते हैं।
  • प्रमुख घटक: इसमें ‘विथानोलाइड्स’ (withanolides) और फ्लेवोनोइड्स जैसे बायोएक्टिव कंपाउंड्स प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • मिट्टी और जलवायु: नागौर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी इस किस्म के लिए आदर्श है, जो इसकी औषधीय शक्ति (potency) को बढ़ाती है।

औषधीय और वैज्ञानिक महत्व:

  • एडाप्टोजेन (Adaptogen): यह शरीर को तनाव के अनुकूल बनाने और कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में मदद करता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य: चिंता, अवसाद और अनिद्रा (insomnia) के उपचार में सहायक है।
  • शारीरिक क्षमता: मांसपेशियों की ताकत, स्टैमिना और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) को बढ़ाता है।
  • प्रजनन स्वास्थ्य: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर और शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करता है।
  • अन्य: जोड़ों के दर्द (गठिया), मधुमेह और हृदय संबंधी विकारों में भी प्रभावी माना जाता है।

आर्थिक महत्व:

  • वैश्विक ब्रांडिंग: अब इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रामाणिक ब्रांड के रूप में बेचा जा सकेगा, जिससे मिलावट पर रोक लगेगी।
  • किसानों की आय में वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और हर्बल कंपनियां अब सीधे किसानों से खरीदारी कर सकेंगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
  • निर्यात क्षमता: वर्तमान में वैश्विक मांग उत्पादन से लगभग 5 गुना अधिक है। भारत सालाना लगभग 1,500-1,600 टन उत्पादन करता है, जिसमें नागौर का 10% योगदान है।

GI टैग और कानूनी ढांचा:

  • परिभाषा: GI टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल होता है और जिनमें उस स्थान के कारण विशिष्ट गुण होते हैं।
  • नियामक संस्था: यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग’ (DPIIT) द्वारा जारी किया जाता है। इसका मुख्यालय चेन्नई में है।
  • कानूनी आधार: यह ‘वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत प्रशासित होता है।
  • अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव: यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के TRIPS समझौते के अनुच्छेद 22-24 द्वारा निर्देशित है।
  • वैधता: पंजीकरण 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत किया जा सकता है।

राजस्थान के अन्य प्रमुख GI टैग उत्पाद: बीकानेरी भुजिया, मकराना मार्बल

कोटा डोरिया, सोजत मेहंदी, मोलेला क्ले वर्क, कठपुतली, ब्लू पॉटरी (जयपुर)।

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