Typhoid cases on the rise in Gujarat
संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गुजरात के गांधीनगर में दूषित जल की आपूर्ति के कारण टाइफाइड के मामलों में आई अचानक तेजी का ‘स्वत: संज्ञान’ (Suo Motu) लिया है। आयोग ने गुजरात के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
- राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 70 सक्रिय मामलों की पुष्टि की है, जिनमें से अधिकांश बच्चे (1 से 16 वर्ष की आयु) हैं।
- उपचार के लिए गांधीनगर सिविल अस्पताल में 30 बिस्तरों वाला विशेष बाल रोग वार्ड स्थापित किया गया है।
टाइफाइड क्या है?
टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन (जीवाणु संक्रमण) है जो मुख्यतः दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलता है।
- जनक (Causative Agent): यह साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह केवल मनुष्यों को प्रभावित करता है।
- प्रसार का माध्यम: यह मुख्य रूप से ‘फिकल-ओरल रूट’ (Fecal-Oral Route) से फैलता है। दूषित जल, संक्रमित भोजन और स्वच्छता की कमी इसके प्राथमिक कारण हैं।
- लक्षण: संक्रमण के बाद लक्षण आमतौर पर 6 से 30 दिनों में दिखाई देते हैं:
- लगातार तेज बुखार: जो धीरे-धीरे 103°–104° F तक पहुँच जाता है।
- गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं: पेट दर्द, कब्ज या दस्त।
- अन्य लक्षण: सिरदर्द, कमजोरी, भूख न लगना और शरीर पर गुलाबी धब्बे (Rose spots)।
- प्रभाव: यदि उपचार न किया जाए, तो यह आंतों में छेद (Intestinal perforation) और आंतरिक रक्तस्राव का कारण बन सकता है।
- उपचार: विडल टेस्ट एक पारंपरिक परीक्षण है। अब टाइफिडॉट (Typhidot) और ब्लड कल्चर के माध्यम से भी इसका उपचार किया जाता है।
- एंटीबायोटिक्स: इसका उपचार मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं (जैसे सिप्रोफ्लोक्सासिन, एज़िथ्रोमाइसिन) से किया जाता है।
सरकारी पहल:
- टीकाकरण: भारत में टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (TCV) उपलब्ध है। यह लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है और छोटे बच्चों के लिए भी सुरक्षित है।
- स्वच्छ भारत मिशन: स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से खुले में शौच को समाप्त कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- जल जीवन मिशन: स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित कर टाइफाइड के मामलों को कम करने में यह मिशन (SDG 6 की प्राप्ति के लिए) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC):
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत की एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई थी।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसका आदर्श वाक्य ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ है।
- इसमें एक अध्यक्ष (जो भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो), 5 पूर्णकालिक सदस्य और 7 मानद (Ex-officio) सदस्य शामिल होते हैं।
- इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक छह-सदस्यीय समिति (अध्यक्ष: प्रधानमंत्री) की सिफारिश पर की जाती है।
- इसमें अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
- यह मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जाँच (स्वयं की पहल या याचिका पर) करता है।
- आयोग के पास दीवानी अदालत (Civil Court) की शक्तियाँ हैं, जिससे यह गवाहों को बुलाने और सार्वजनिक रिकॉर्ड माँगने में सक्षम है।

