Discover the Green Cave in Kanger Ghati National Park
संदर्भ:
हाल ही में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (छत्तीसगढ़) में ‘ग्रीन गुफा’ की खोज की गई। यह खोज न केवल पर्यटन की दृष्टि से, बल्कि भू-विज्ञान और जैव-विविधता के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रीन गुफा की विशेषताएं:
- बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के दुर्गम क्षेत्रों में भू-वैज्ञानिकों ने एक नई गुफा खोजी है, जिसे इसकी दीवारों पर जमी विशेष काई और खनिज संरचनाओं के कारण ‘ग्रीन गुफा’ नाम दिया गया है।
- इस गुफा की दीवारों और छत से लटकने वाली चूना पत्थर की संरचनाओं (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग के सूक्ष्मजीवों (Microbial layers/Algae) की एक परत जमी है।
- कांगेर घाटी की अन्य 27 खोजी गई गुफाओं के विपरीत, यह एकमात्र ऐसी गुफा है जिसमें दोपहर के समय केवल एक घंटे के लिए सूरज की रोशनी सीधे प्रवेश करती है।
- यह गुफा कुटुमसर गुफा परिसर के पास (कंपार्टमेंट नंबर 85) स्थित है। इसमें एक विशाल कक्ष (Large Chamber) है जहाँ चमकदार स्टैलेक्टाइट्स और ‘फ्लो-स्टोन’ (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखी जा सकती हैं।
- यह एक कार्स्ट स्थलाकृति (Karst Topography) का उदाहरण है। यह गुफा लाखों वर्षों में पानी के कटाव और रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) से बनी है।
महत्व:
- पुरा-जलवायु अध्ययन: गुफाओं के भीतर जमा होने वाले स्टैलेग्माइट्स के स्तरों का अध्ययन करके वैज्ञानिक पिछले हजारों वर्षों के वर्षा पैटर्न और जलवायु परिवर्तन का सटीक डेटा प्राप्त कर सकते हैं।
- जैव-विविधता: ऐसी गुफाओं में ‘ट्रोग्लोबाइट्स’ पाए जाते हैं—ऐसे जीव जो पूर्णतः अंधेरे में रहने के अनुकूल होते हैं। यहाँ अंधी मछलियों और झींगों की नई प्रजातियाँ मिलने की संभावना है।
- खनिज संरचना: गुफा की हरी आभा विशिष्ट सूक्ष्मजीवों या तांबे के खनिजों की उपस्थिति का संकेत दे सकती है, जो शोध का विषय है।
- इको-टूरिज्म: यह खोज बस्तर को ‘गुफा पर्यटन’ (Cave Tourism) के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगी। प्रशासन यहाँ ‘सीमित पर्यटन’ (Controlled Tourism) मॉडल लागू करने की योजना बना रहा है।
- रोजगार: स्थानीय धुरवा और गोंड जनजातियों के युवाओं को ‘गाइड’ के रूप में प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान:
- अवस्थिति: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित यह उद्यान (स्थापना 1982) लगभग 200 वर्ग किमी में फैला है। इसका नाम कांगेर नदी पर आधारित है, जो इसे उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर काटती है।
- भू-वैज्ञानिक महत्व: यह अपने अद्वितीय चूना पत्थर (Limestone) भंडारों और कार्स्ट स्थलाकृति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कुटुंबसर, कैलाश और दंडक जैसी गुफाएँ हैं, जिनमें स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स की अद्भुत संरचनाएँ मिलती हैं।
- जैव-विविधता: यह राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी ‘बस्तर पहाड़ी मैना‘ का प्राकृतिक आवास है। यहाँ ‘साल’ और ‘सागौन’ के मिश्रित आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
- जल विज्ञान: यहाँ का प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात मुनगा-बहार नदी पर स्थित है, जो एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है। यह दक्कन जैव-भौगोलिक क्षेत्र और पूर्वी घाट के मिलन स्थल पर स्थित होने के कारण पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
- UNESCO दर्जा: यह उद्यान वर्तमान में UNESCO की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल है।

