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जिला-आधारित वस्त्र कायाकल्प योजना की शुरुआत (District-based textile rejuvenation scheme launched) | UPSC

District-based textile rejuvenation scheme launched

District-based textile rejuvenation scheme launched

संदर्भ: 

हाल ही में भारत सरकार द्वारा जिला-आधारित ‘वस्त्र कायाकल्प’ (District-led Textile Transformation – DLTT) योजना शुरू की गई। यह योजना स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

जिला-आधारित ‘वस्त्र कायाकल्प’ योजना के बारे में:

    • परिचय: कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) द्वारा शुरू की गई इस योजना के माध्यम से भारत के उन विशिष्ट जिलों की पहचान की जाएगी, जिनमें कपड़ा उत्पादन की ऐतिहासिक या उभरती हुई क्षमता है। 
    • उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य डेटा-संचालित दृष्टिकोण के माध्यम से 100 उच्च-क्षमता वाले जिलों और 100 आकांक्षी जिलों को ‘आत्मनिर्भर टेक्सटाइल हब’ के रूप में विकसित करना है। 

विशेषताएं:

    • डेटा-संचालित वर्गीकरण: जिलों का चयन तीन प्रमुख मानदंडों—निर्यात प्रदर्शन (Export Performance), MSME पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती और कार्यबल की उपस्थिति के आधार पर किया गया है।
    • चैंपियन जिले (Champion Districts): यहाँ उन्नत बाधाओं को दूर करने, ‘मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ (CFCs) को अपग्रेड करने, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाने और सीधे वैश्विक बाजार लिंकेज स्थापित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
    • आकांक्षी जिले (Aspirational Districts): यहाँ बुनियादी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण, कौशल विकास, कार्यबल प्रमाणन, कच्चे माल के बैंक (Raw Material Banks) स्थापित करने और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
    • ‘पूर्वोदय’ संगम (Purvodaya Convergence): योजना के तहत पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें जनजातीय क्षेत्रों का विकास, कनेक्टिविटी में सुधार और सांस्कृतिक हस्तशिल्प के लिए जीआई (GI) टैगिंग सुनिश्चित करना शामिल है।
    • सहयोगात्मक मॉडल: यह कार्यक्रम सरकारी संसाधनों, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच साझेदारी के माध्यम से लागू किया जाएगा।
    • डिजिटल और टिकाऊ विकास: योजना में आधुनिक विनिर्माण प्रथाओं और ई-कॉमर्स निर्यात के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के एकीकरण पर विशेष बल दिया गया है।

 महत्व

  • रोजगार सृजन: कपड़ा क्षेत्र कृषि के बाद भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। यह योजना ग्रामीण युवाओं को पलायन से रोककर उनके जिले में ही रोजगार के अवसर प्रदान करेगी।
  • निर्यात में वृद्धि: भारत का लक्ष्य 2030 तक $250 बिलियन का कपड़ा उत्पादन और $100 बिलियन का निर्यात हासिल करना है। DLTT इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करेगी।
  • महिला सशक्तिकरण: कपड़ा क्षेत्र में 60-70% कार्यबल महिलाएं हैं। प्रत्यक्ष निवेश और प्रशिक्षण से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 
  • 5F विजन: यह योजना प्रधानमंत्री के 5F विजन (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) को धरातल पर उतारने का प्रयास है। 

विशेष: 5F विजन योजना (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign): 

  • Farm (खेत): कच्चे माल (कपास, रेशम, ऊन) की गुणवत्ता में सुधार।
  • Fibre (रेशा): कताई और धागा निर्माण इकाइयों का जिला स्तर पर सुदृढ़ीकरण।
  • Factory (कारखाना): जिले में ही विनिर्माण केंद्रों की स्थापना।
  • Fashion (फैशन): वैश्विक रुझानों के अनुरूप डिजाइनिंग।
  • Foreign (विदेश): अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और ई-कॉमर्स के माध्यम से निर्यात।

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