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सरकार द्वारा व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन सिस्टम लाने की योजना (Government plans to introduce vehicle-to-vehicle communication system) | Ankit Avasthi Sir

Government plans to introduce vehicle-to-vehicle communication system

Government plans to introduce vehicle-to-vehicle  communication system

संदर्भ:

भारत सरकार सड़क सुरक्षा में सुधार और परिवहन दक्षता को बढ़ाने के लिए 2026 के अंत तक राष्ट्रव्यापी स्तर पर वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यह पहल ‘इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ का एक हिस्सा है, जो डिजिटल इंडिया और ‘विजन शून्य’ (सड़क दुर्घटनाओं को शून्य करना) के लक्ष्यों के अनुरूप है। 

व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम क्या है?

  • परिचय: V2V संचार एक ऑटोमोटिव तकनीक है जो वाहनों को एक-दूसरे के साथ वायरलेस तरीके से डेटा साझा करने की अनुमति देती है। 
  • उद्देश्य: चालक को उन संभावित खतरों के बारे में सचेत करना जिन्हें वे देख नहीं पाते (जैसे अंधा मोड़ या अचानक ब्रेक लगाना)।
  • तकनीक: इस सिस्टम में ‘डेडिकेटेड शॉर्ट-रेंज कम्युनिकेशंस’ (DSRC) या 5G सेलुलर नेटवर्क (C-V2X) तकनीक का उपयोग किया जाता है। 
  • ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU): प्रत्येक वाहन में एक डिवाइस (लगभग सिम कार्ड जैसा) स्थापित किया जाएगा, जो वायरलेस सिग्नल के माध्यम से जानकारी प्रसारित और प्राप्त करेगा।
  • कार्यप्रणाली: वाहन अपनी गति, स्थान, दिशा और ब्रेकिंग स्थिति जैसे डेटा को 360-डिग्री कवरेज के साथ आसपास के अन्य वाहनों को प्रसारित करते हैं।

V2X इकोसिस्टम:

2026 तक भारत केवल V2V के साथ साथ संपूर्ण V2X (Vehicle-to-Everything) वातावरण विकसित करने का लक्ष्य बना रहा है। जिसमें शामिल हैं:

  1. V2I (Vehicle-to-Infrastructure): वाहन और ट्रैफिक सिग्नल/सड़क संकेतों के बीच संचार।
  2. V2P (Vehicle-to-Pedestrian): पैदल चलने वालों और वाहनों के बीच सुरक्षा अलर्ट।
  3. V2N (Vehicle-to-Network): रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए क्लाउड डेटा का उपयोग। 

भारत सरकार की पहल:

  • MORTH की भूमिका: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने वाहनों के लिए नए सुरक्षा मानकों में V2V सेंसर को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
  • 5G रोलआउट: भारत में 5G का तेजी से विस्तार C-V2X (Cellular V2X) के कार्यान्वयन को संभव बना रहा है, जो पारंपरिक DSRC से अधिक प्रभावी है।
  • AIS-140 मानक: सरकार ने पहले ही सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग उपकरणों को अनिवार्य कर दिया है, जिसे अब V2V क्षमताओं के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।
  • सेमीकंडक्टर मिशन: भारत का अपना Semicon India Program इन संचार चिप्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है।

महत्व:

  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी: भारत में विश्व के केवल 1% वाहन हैं, लेकिन वैश्विक सड़क मृत्यु दर में भारत का हिस्सा 11% है। V2V तकनीक लगभग 80% गैर-हानिकारक दुर्घटनाओं को रोक सकती है।
  • यातायात प्रबंधन: यह तकनीक ट्रैफिक जाम को कम करने और ईंधन दक्षता बढ़ाने में मदद करेगी।
  • स्मार्ट सिटी मिशन: यह 2026 तक भारत के स्मार्ट शहरों के बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग होगा। 
  • ईंधन की बचत: सुचारू यातायात प्रवाह से बार-बार ब्रेक लगाने और स्टार्ट करने की जरूरत कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता: माल ढुलाई के समय में कमी आएगी, जिससे भारत की लॉजिस्टिक्स लागत (जीडीपी का वर्तमान में ~14%) कम होगी।

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