India indigenous long range anti-ship missile

संदर्भ:
भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (LR-ASHM) का प्रदर्शन इस बार 26 जनवरी, 2026 को गणतंत्र दिवस परेड में किया जाएगा।
लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल LR-ASHM के बारे में:
- विकास: LR-ASHM (Long Range Anti-Ship Missile) एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (HGV) है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
- मिसाइल का प्रकार: यह एक बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है।
- गति (Speed): यह ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना (Mach 10) अधिक वेग से यात्रा करती है, जिससे दुश्मन के रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया करने का बहुत कम समय मिलता है।
- मारक क्षमता (Range): इसकी परिचालन रेंज 1,500 किलोमीटर से अधिक है, जिससे भारतीय नौसेना को सुरक्षित दूरी से दुश्मन के बड़े नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता मिलती है।
- उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System): यह उन्नत नेविगेशन, सक्रिय रडार होमिंग और टर्मिनल मार्गदर्शन प्रणालियों से लैस है, जो जटिल समुद्री परिस्थितियों में भी सटीक लक्ष्य सुनिश्चित करती है।
- फ़्लाइट प्रोफ़ाइल (Flight Profile): यह समुद्र-सतह के बहुत करीब से उड़ान भरने की क्षमता रखती है, जिससे यह दुश्मन के रडार का पता लगने से बच जाती है।
- पेलोड (Payloads): यह पारंपरिक और परमाणु (nuclear) दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है।
- प्रक्षेपण प्लेटफ़ॉर्म (Launch Platforms): इसे विभिन्न नौसैनिक प्लेटफार्मों, जैसे कि विध्वंसक, फ्रिगेट, और पनडुब्बियों के साथ-साथ भूमि-आधारित लॉन्चरों (TEL) से भी लॉन्च किया जा सकता है।
महत्व:
- आत्मनिर्भरता: LR-ASHM का स्वदेशी विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में एक मील का पत्थर है। यह भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- शक्ति संतुलन: यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और निवारक क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है। यह चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के लिए एक सीधा जवाब है।
- ‘कैरियर-किलर’ क्षमता: इस मिसाइल की “कैरियर-किलर” क्षमता (दुश्मन के विमान वाहक पोतों को नष्ट करने की क्षमता) भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के विशिष्ट समूह में शामिल करती है।
- प्रौद्योगिकी प्रदर्शन: इस मिसाइल का विकास भारत के हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन (HSTDV) परियोजना पर आधारित है, जिसने स्क्रैमजेट प्रोपल्शन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों को मान्य किया।
