Indian Navy plans to build a new naval base in Haldia

संदर्भ:
भारतीय नौसेना ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नए रणनीतिक नौसैनिक डिटैचमेंट (Naval Detachment) पर कार्य प्रारंभ किया है। यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति और विशेष रूप से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सामरिक अवस्थिति और भौगोलिक महत्व:
- हुगली नदी पर स्थान: हल्दिया हुगली नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। यह कोलकाता से लगभग 100-130 किमी दूर है और सीधे बंगाल की खाड़ी के गहरे समुद्री मार्गों तक पहुंच प्रदान करता है।
- तटवर्ती सुरक्षा भारत के पास पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रमुख नौसैनिक अड्डे हैं। हल्दिया में एक नौसैनिक टुकड़ी की स्थापना उत्तरी बंगाल की खाड़ी में तटीय और निकट-समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
- प्रमुख शिपिंग लेन की निगरानी: यह बेस महत्वपूर्ण शिपिंग लेन (समुद्री मार्गों) और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले यातायात के करीब स्थित है। यहां से समुद्री यातायात की बेहतर निगरानी (Maritime Domain Awareness – MDA) संभव होगी।
तैनाती और क्षमताएं:
- छोटे और तेज़ युद्धपोतों पर ध्यान: यह एक पूर्ण नौसैनिक कमान नहीं, बल्कि एक नौसैनिक टुकड़ी होगी, जिसमें लगभग 100 नौसैनिक अधिकारी और नाविक तैनात होंगे।
- विशेषीकृत पोत: यह बेस मुख्य रूप से छोटे, हाई-स्पीड प्लेटफॉर्म जैसे ‘फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट’ (FIC) और ‘न्यू वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट’ (NWJFAC) को समर्थन देगा।
- अभियानगत भूमिका: ये पोत तटीय गश्त, घुसपैठ-रोधी अभियानों, बंदरगाह रक्षा, और कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनकी गति (40-45 समुद्री मील तक) नौसेना को खतरों और अवैध गतिविधियों पर तेजी से प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाएगी।
- शस्त्रागार: ये पोत CRN-91 गन जैसी लोटेरिंग युद्ध सामग्री प्रणालियों से लैस होंगे, जिससे उनकी सटीक हमले और निगरानी क्षमताएं बढ़ेंगी।
भू-राजनीतिक अनिवार्यताएं:
- चीन की बढ़ती उपस्थिति का मुकाबला: यह कदम चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के जवाब में है।
- बांग्लादेश के साथ रक्षा संबंध: चीन बांग्लादेश के साथ भी रक्षा और बुनियादी ढांचे के सहयोग को मजबूत कर रहा है, जिसमें कॉक्स बाजार में नौसैनिक सुविधाओं का निर्माण शामिल है। हल्दिया बेस इस संदर्भ में यह सुरक्षा प्रदाता की भूमिका को मजबूत करता है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता: पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच हाल ही में मजबूत हुए रक्षा संबंधों के कारण भी भारतीय सुरक्षा योजनाकारों की चिंताएँ बढ़ी हैं, जिससे इस बेस का महत्व और बढ़ जाता है।
- अवैध आवाजाही और तस्करी: भारत-बांग्लादेश तटरेखा के उथले पानी और घने समुद्री यातायात के कारण अवैध घुसपैठ, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियाँ हैं।
