Google Universal Commerce Protocol
संदर्भ:
हाल ही में Google ने डिजिटल कॉमर्स के AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) युग में प्रवेश करने के लिए Universal Commerce Protocol (UCP) लॉन्च किया है।
यूनिवर्सल कॉमर्स प्रोटोकॉल (UCP) क्या है?
- परिचय: यूनिवर्सल कॉमर्स प्रोटोकॉल (Universal Commerce Protocol – UCP) गूगल द्वारा 2026 में लॉन्च किया गया एक ओपन-सोर्स (खुला मानक) है, जिसे एआई-आधारित (AI-led) खरीदारी और बिक्री को सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक विज्ञापन पायलट है जहां खुदरा विक्रेता AI-संचालित खोज परिणामों में सीधे छूट और ऑफ़र प्रस्तुत कर सकते हैं।
- एजेंटिक कॉमर्स: यह एआई को स्टॉक की पुष्टि करने, लॉयल्टी पॉइंट्स लागू करने और ऑर्डर पूरा करने जैसे सक्रिय कार्य करने की अनुमति देता है।
- सहयोगी विकास: Google ने इसे Shopify, Walmart, Target, Visa, Mastercard और Flipkart जैसे 20 से अधिक उद्योग जगत के लीडर्स के सहयोग से विकसित किया है।
UCP कैसे काम करता है?
- UCP, AI एजेंटों को खुदरा विक्रेताओं के बैकएंड सिस्टम के साथ सुरक्षित रूप से बातचीत करने में सक्षम बनाने के लिए मानकीकृत डेटा संरचना का उपयोग करता है।
- जब कोई उपयोगकर्ता AI से कोई उत्पाद खोजने के लिए कहता है, तो AI, UCP का उपयोग करके खुदरा विक्रेताओं के डेटाबेस तक पहुँचता है और प्रासंगिक जानकारी प्राप्त करता है।
- UCP “क्लिक-थ्रू” को समाप्त करता है। लेनदेन, Google Pay या PayPal के माध्यम से AI इंटरफ़ेस के भीतर पूरा किया जा सकता है, जिसमें Google Wallet में सहेजे गए भुगतान विवरण का उपयोग होता है।
- यह खुदरा विक्रेताओं को Google Search पर अपने ब्रांड-विशिष्ट AI एजेंटों के साथ सीधे ग्राहकों से चैट करने की सुविधा देता है, जो वास्तविक समय में उत्पाद प्रश्नों का उत्तर देते हैं।
UCP के लाभ:
- उपभोक्ताओं के लिए: UCP खरीदारी के अनुभव को पूरी तरह से सहज बनाता है। इससे अलग-अलग वेबसाइटों पर जाने और बार-बार अपनी जानकारी भरने की आवश्यकता खत्म हो जाती है, जिससे समय की बचत होती है।
- खुदरा विक्रेताओं के लिए: विक्रेताओं के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ ‘यूनिवर्सल एक्सेस’ है, जहाँ उन्हें हर एआई प्लेटफॉर्म के लिए अलग से तकनीक विकसित नहीं करनी पड़ती। यह छोटे और बड़े दोनों व्यापारियों को एआई-संचालित बाजार में समान अवसर देता है।
- तकनीकी और बाजार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए: यह प्रोटोकॉल एक ‘खुला मानक’ (Open Standard) होने के कारण ई-कॉमर्स में एकाधिकार को कम करता है और विभिन्न एआई एजेंटों, बैंकों और मर्चेंट प्लेटफार्मों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ:
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: AI एजेंटों द्वारा प्रबंधित लेनदेन में बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा शामिल होता है। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना एक प्रमुख चुनौती है।
- प्रभुत्व और प्रतिस्पर्धा: Google, इस प्रोटोकॉल के माध्यम से ई-कॉमर्स फ़नल पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। यह बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।
- विनियामक ढाँचा: भारत जैसे देशों में UCP और इसी तरह के प्रोटोकॉल्स के लिए एक मजबूत विनियामक ढाँचे की आवश्यकता होगी।

