Declining Himalayan Brown Bear Population
संदर्भ:
हालिया पारिस्थितिक सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों में हिमालयी ब्राउन बियर की आबादी घटकर मात्र 130 से 220 के बीच रह गई है। यह प्रजाति अब ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ स्थिति में है, जो उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
लद्दाख में हिमालयी ब्राउन बियर पर नवीन सर्वेक्षण:
- हिमालयी भूरे भालू की स्थिति का सटीक आंकलन करने के लिए हाल ही में लद्दाख में सबसे बड़ा और करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर में एक सर्वेक्षण किया गया, जो ट्रांस-हिमालय क्षेत्र का विस्तृत भू-भाग है।
- इस सर्वेक्षण में सिस्टमैटिक साइन-आधारित सर्वेक्षण अपनाया गया, जिसमें भालू के पैरों के निशान, मल, मिट्टी में खोदने के निशान और प्रत्यक्ष अवलोकन को दस्तावेजीकृत किया गया।
- शोध टीम ने कुल 4,012 ट्रेल्स पर भालू के संकेत एकत्र किए और Occupancy मॉडलिंग तथा MaxEnt प्रकार के स्पेशियल वितरण मॉडल का उपयोग किया गया।
- सर्वेक्षण के अनुसार भूरा भालू मुख्य रूप से उन घाटियों और रणभूमि क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ मौसमी वनस्पति, जल स्रोत और मध्यम ऊँचाई की कठिन-भू-आकृति उपलब्ध है।
- आश्चर्यजनक रूप से इन उच्च-गुणवत्ता वाले निवासों में से अधिकांश वर्तमान में किसी संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) में नहीं आते हैं, बल्कि वे सरंक्षित क्षेत्रों के बाहर स्थित पाए गए हैं।
- भूरा भालू की उपस्थिति मुख्य रूप से मध्यम ऊँचाई और रेंगलैंड्स में पाई गई, जहाँ भूमि की उथल-पुथल (terrain ruggedness) अधिक होती है।
- अध्ययन में पाया गया कि मौजूदा संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क (जैसे वाइल्डलाइफ सैंक्चुरिज़ और राष्ट्रीय उद्यान) भूरा भालू के उच्च-गुणवत्ता वाले आवास को पर्याप्त रूप से कवर नहीं कर पाते हैं।
- हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान के कारण उच्च ऊंचाई वाले घास के मैदानों (Alpine Meadows) की पारिस्थितिकी बदल रही है, जिससे उनके भोजन के स्रोत कम हो रहे हैं।
हिमालयी ब्राउन बियर (Ursus arctos isabellinus):
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- वर्गीकरण: हिमालयी ब्राउन बियर भूरे भालू की सबसे प्राचीन उप-प्रजातियों में से एक है। ये आकार में अन्य एशियाई भालुओं की तुलना में बड़े होते हैं। इनके घने फर का रंग रेतीले से लेकर लाल-भूरा तक होता है। नर भालू मादाओं की तुलना में आकार में काफी बड़े होते हैं।
- क्षेत्र: ये मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान और नेपाल के उच्च हिमालयी और ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- ऊँचाई: ये आमतौर पर 3,000 से 5,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित अल्पाइन घास के मैदानों और उप-अल्पाइन झाड़ियों में रहते हैं।
- भारत में स्थान: इनकी उपस्थिति जम्मू-कश्मीर (किश्तवाड़ और दाचीगाम), लद्दाख (कारगिल और ज़ंस्कार), हिमाचल प्रदेश (ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क) और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में है।
- आहार (Omnivorous): ये सर्वाहारी होते हैं। इनका मुख्य भोजन घास, जड़ें, फल, जामुन और कीड़े-मकोड़े हैं। हालांकि, ये कभी-कभी छोटे स्तनधारियों और भेड़ों/बकरियों का शिकार भी करते हैं।
- शीतनिद्रा (Hibernation): सर्दियों की कठोरता से बचने के लिए ये अक्टूबर-नवंबर से लेकर मार्च-अप्रैल तक गुफाओं में शीतनिद्रा में रहते हैं।
- प्रजनन: इनका प्रजनन चक्र धीमा होता है, जिससे इनकी आबादी में वृद्धि की दर बहुत कम होती है।
- संरक्षण स्थिति:
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- IUCN रेड लिस्ट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered)।
- CITES: परिशिष्ट I (Appendix I) – अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (Schedule I) – उच्चतम कानूनी सुरक्षा।
पारिस्थितिकी महत्व:
हिमालयी ब्राउन बियर एक ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ (Umbrella Species) है। इसके संरक्षण से उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की अन्य प्रजातियों और वनस्पतियों का संरक्षण स्वतः सुनिश्चित हो जाता है। यह पारिस्थितिक तंत्र में बीज प्रसारक (Seed Dispersal) की भूमिका भी निभाता है।

