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करण फ्राइज नामक नई नस्ल की गाय का पंजीकरण (Registration of new breed of cow named Karan Fries) | UPSC Preparation

Registration of new breed of cow named Karan Fries

Registration of new breed of cow named Karan Fries

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) ने ‘करन फ्राइज’ (Karan Fries) नामक एक नई गाय के नस्ल के पंजीकृत करने की घोषणा की है।

करन फ्राइज (Karan Fries) के बारे में:

करन फ्राइज एक सिंथेटिक (संकर) नस्ल है। इसे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल द्वारा विकसित किया गया है।  

    • जेनेटिक क्रॉस (Genetic Cross): यह भारतीय मूल की थारपारकर (Tharparkar) गाय और विदेशी नस्ल होल्स्टीन-फ्राइजियन (Holstein-Friesian) सांड के संकरण से तैयार की गई है।
    • अनुवांशिकी: इसमें लगभग 62.5% होल्स्टीन-फ्राइजियन और शेष थारपारकर का अंश होता है।
    • उद्देश्य: इस नस्ल का मुख्य लक्ष्य भारतीय जलवायु (गर्मी और आर्द्रता) में उच्च दूध उत्पादन क्षमता प्राप्त करना था। 

प्रमुख विशेषताएं:

    • शारीरिक बनावट: ये आमतौर पर काले और सफेद रंग के होते हैं। इनमें भारतीय गायों की तरह ‘कूबड़’ (Hump) नहीं होता।
    • दूध उत्पादन: करन फ्राइज की औसत दुग्ध क्षमता लगभग 3,550 किलोग्राम प्रति लैक्टेशन (10 महीने) है। अधिकतम दैनिक दूध उत्पादन 46.5 किलो तक दर्ज किया गया है।
    • अनुकूलन क्षमता: थारपारकर के गुणों के कारण यह नस्ल भारत की उष्णकटिबंधीय जलवायु, विशेषकर गर्म और आर्द्र परिस्थितियों के प्रति अत्यधिक सहनशील है।
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह अन्य विदेशी नस्लों की तुलना में भारतीय रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी है। 

महत्व:

  • डेयरी क्षेत्र में क्रांति: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। करन फ्राइज जैसी नस्लें, जो स्वदेशी नस्लों (1,000-2,000 किलो) की तुलना में दोगुना दूध देती हैं, डेयरी किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगी।
  • जलवायु अनुकूलन: जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी नस्लें महत्वपूर्ण हैं जो उच्च उत्पादकता के साथ-साथ गर्मी सहने की क्षमता भी रखती हैं।
  • नस्ल स्थिरीकरण: NDRI के अनुसार, चार दशकों के अनुसंधान के बाद अब यह नस्ल ‘स्थिर’ (Stabilized) हो गई है, जिसका अर्थ है कि अगली पीढ़ियों में भी इसके गुण समान रहेंगे। 

2026 के दौरान पंजीकृत अन्य प्रमुख नस्लें: 

  • मवेशी (Cattle): मेदिनी (झारखंड), रोहिलखंडी (उत्तर प्रदेश)।
  • भैंस: मेलघाटी (महाराष्ट्र)।
  • बकरी: पलामू (झारखंड), उदयपुरी (उत्तराखंड)।
  • मिथुन: नागामी (नागालैंड)।
  • सिंथेटिक नस्लें: वृंदावनी (उत्तर प्रदेश – गाय), अविशान (राजस्थान – भेड़)।

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