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ILO की विश्व रोजगार एवं सामाजिक रुझान 2026 रिपोर्ट जारी (ILO World Employment and Social Trends 2026 report released) | UPSC

ILO World Employment and Social Trends 2026 report released

ILO World Employment and Social Trends 2026 report released

संदर्भ: 

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा ‘वर्ल्ड एम्प्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक: ट्रेंड्स 2026’ (WESO Trends 2026) रिपोर्ट जारी की गई, जो वैश्विक श्रम बाजार की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

रोजगार एवं सामाजिक रुझान 2026 रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • बेरोजगारी दर: 2026 में वैश्विक बेरोजगारी दर 4.9% पर स्थिर रहने का अनुमान है, जो लगभग 18.6 करोड़ (186 million) लोगों को प्रभावित करेगी।
  • रोजगार अंतराल (Jobs Gap): बेरोजगारी के आंकड़ों से परे, रिपोर्ट ‘रोजगार अंतराल’ की ओर इशारा करती है, जिसमें वे लोग शामिल हैं जो काम करना चाहते हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा। यह संख्या 2026 में 40.8 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
  • कार्यशील निर्धनता (Working Poverty): लगभग 28.4 करोड़ श्रमिक अभी भी अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं, जिनकी दैनिक आय 3 डॉलर (लगभग ₹250) से कम है।
  • अनौपचारिक रोजगार: अनौपचारिकता (Informality) में वृद्धि चिंताजनक है। 2026 तक लगभग 2.1 अरब (2.1 billion) श्रमिकों के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने की संभावना है, जहां उन्हें सामाजिक सुरक्षा और कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होते। 
  • लैंगिक अंतराल (Gender Gap): वैश्विक रोजगार में महिलाओं की भागीदारी केवल 40% है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी की संभावना 24% कम है।
  • युवा रोजगार संकट: 2025 में युवा बेरोजगारी दर बढ़कर 12.4% हो गई थी। वर्तमान में, लगभग 26 करोड़ युवा ‘NEET’ (शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में नहीं) श्रेणी में हैं।
  • क्षेत्रीय असंतुलन: निम्न-आय वाले देशों में जनसंख्या वृद्धि के बावजूद उत्पादक रोजगार का अभाव है, जिससे इन देशों के लिए ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) का लाभ उठाना मुश्किल हो रहा है। 
  • AI और स्वचालन (Automation): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उच्च-आय वाले देशों में शिक्षित युवाओं के प्रवेश स्तर के पदों के लिए खतरा पैदा कर रही है।
  • व्यापार अनिश्चितता: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और व्यापार नीतियों में अस्थिरता के कारण दक्षिण-पूर्वी एशिया और यूरोप में श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी (Real Wages) में गिरावट देखी गई है।
  • जनसांख्यिकीय बदलाव: अमीर देशों में बुजुर्ग होती आबादी श्रम आपूर्ति को कम कर रही है, जबकि विकासशील देशों में युवा आबादी के लिए पर्याप्त अवसर नहीं हैं। 

भारत के लिए निहितार्थ:

  • कौशल विकास: भारत को अपनी बढ़ती युवा आबादी के लिए एआई-सक्षम और तकनीकी रूप से उन्नत क्षेत्रों में कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • औपचारिकीकरण (Formalization): असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर संक्रमण भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए, जैसा कि ILO की सिफारिश है।
  • डिजिटल निर्यात: डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाएँ अब वैश्विक निर्यात का 14.5% हिस्सा हैं, जिसमें भारत एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है। 

ILO की मुख्य सिफारिशें:

  • उत्पादकता निवेश: शिक्षा, बुनियादी ढांचे और डिजिटल कनेक्टिविटी में निवेश बढ़ाना।
  • समावेशी नीतियां: लैंगिक और युवा अंतराल को पाटने के लिए विशेष लक्षित कार्यक्रम चलाना।
  • उत्तरदायी तकनीक: AI का उपयोग इस तरह करना कि वह मानव श्रम का पूरक बने, न कि पूर्ण प्रतिस्थापन।
  • वैश्विक सहयोग: ऋण संकट और व्यापार अस्थिरता से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और राजकोषीय समन्वय।

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