Yemen strategic country located in the Arabian Peninsula
संदर्भ:
यमन (Yemen) अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम कोने पर स्थित एक रणनीतिक देश है, जो वर्तमान में गंभीर मानवीय और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। इसी राजनीतिक संकट के चलते वहां के प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्राइक ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को नया प्रधानमंत्री बनाया गया है।
भौगोलिक अवस्थिति:
- सीमाएँ: यमन के उत्तर में सऊदी अरब और पूर्व में ओमान स्थित है। इसके पश्चिम में लाल सागर और दक्षिण में अदन की खाड़ी तथा अरब सागर हैं।
- प्रमुख जलडमरूमध्य: यमन बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य पर स्थित है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यह वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट्स (Choke Points) में से एक है।
- द्वीप: यमन के प्रमुख द्वीपों में सोकोट्रा (Socotra) (अरब सागर) और पेरिम (Perim) (बाब अल-मंडेब में) शामिल हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक संकट:
- एकीकरण: आधुनिक यमन का गठन 1990 में उत्तरी यमन और दक्षिणी यमन के विलय से हुआ था।
- 2011 की क्रांति: अरब स्प्रिंग (Arab Spring) के दौरान राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ी, जिसके बाद अब्दराबुह मंसूर हादी सत्ता में आए।
- गृहयुद्ध (2014-वर्तमान): हूती विद्रोहियों (Ansar Allah) ने 2014 में राजधानी साना (Sana’a) पर कब्जा कर लिया, जिससे गृहयुद्ध शुरू हुआ। वर्तमान में, यमन तीन मुख्य शक्तियों में विभाजित है:
- हूती विद्रोही: उत्तरी यमन और साना पर नियंत्रण। इन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है।
- अंतर्राष्ट्री मान्यता वाली सरकार: वर्तमान में ‘प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल’ (PLC) के रूप में कार्यरत।
- दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC): दक्षिणी यमन में सक्रिय अलगाववादी समूह, जिसे UAE का समर्थन प्राप्त है।
भू-राजनीतिक महत्व:
- प्रॉक्सी वार (Proxy War): यमन को अक्सर सऊदी अरब (सुन्नी) और ईरान (शिया) के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई के केंद्र के रूप में देखा जाता है।
- सुरक्षा चिंताएं: बाब अल-मंडेब में अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डालती है। साथ ही, अल-कायदा (AQAP) और ISIS जैसे समूहों की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
भारत और यमन संबंध:
- ऑपरेशन राहत (Operation Raahat): 2015 में भारत ने यमन से अपने नागरिकों और अन्य विदेशियों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया था।
- ऊर्जा सुरक्षा: लाल सागर मार्ग से भारत का अधिकांश व्यापार और कच्चा तेल गुजरता है, इसलिए यमन में शांति भारत के आर्थिक हितों के लिए अनिवार्य है।
- ऐतिहासिक संबंध: भारत और यमन के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंध रहे हैं, विशेषकर अदन बंदरगाह और गुजरात के बीच।

