Population status of the critically endangered gharial in the Ganga river basin
संदर्भ:
हाल ही में जारी भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की व्यापक रिपोर्ट—’गंगा नदी बेसिन में गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति और संरक्षण कार्ययोजना’—के अनुसार गंगा बेसिन की 13 नदियों में कुल 3,037 घड़ियालों की पहचान की गई है। यह पहली बार है जब घड़ियालों की आबादी का बेसिन-व्यापी मानचित्रण 22 नदियों के 7,000 किमी से अधिक क्षेत्र में किया गया है।
सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष:
यह अध्ययन नवंबर 2020 से मार्च 2023 के बीच आयोजित किया गया था, जिसके परिणाम जनवरी 2026 में सार्वजनिक किए गए।
- कुल जनसंख्या: 13 नदियों में 3,037 घड़ियाल पाए गए।
- चंबल नदी का दबदबा: अकेले चंबल नदी में 2,097 घड़ियाल दर्ज किए गए, जो कुल आबादी का दो-तिहाई से अधिक है।
- अन्य प्रमुख निवास स्थान: घाघरा नदी (463) और गिरवा नदी (158) में भी महत्वपूर्ण संख्या पाई गई।
- निम्न उपस्थिति: मुख्य गंगा और कोसी नदी में उपस्थिति दर सबसे कम (0.02 व्यक्ति प्रति किमी) रही।
घड़ियाल (Gavialis gangeticus) का परिचय:
घड़ियाल एक अनोखा मगरमच्छ है जो अपने लंबे और पतले थूथन के लिए जाना जाता है।
- घड़ा (Ghara): वयस्क नरों के थूथन के सिरे पर एक बल्ब जैसी संरचना होती है जिसे ‘घड़ा’ कहा जाता है, इसी से इनका नाम पड़ा है।
- भोजन: ये मुख्य रूप से मछली खाने वाले (Piscivorous) प्राणी हैं।
- पारिस्थितिक महत्व: ये ताजे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक (Indicator Species) हैं।
संरक्षण की स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered)।
- IUCN ग्रीन स्टेटस: इन्हें ‘क्रिटिकली डिप्लीटेड’ (Critically Depleted) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा)।
- CITES: परिशिष्ट-I (Appendix I)।
भारत में प्रमुख घड़ियाल अभयारण्य:
भारत के तीन राज्य—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान—घड़ियाल संरक्षण के केंद्र हैं।
- राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य: यह तीन राज्यों के मिलन बिंदु पर स्थित है और दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी आबादी का घर है।
- कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (UP): गिरवा नदी का क्षेत्र।
- सोन घड़ियाल अभयारण्य (MP): सोन नदी पर स्थित।
- गंडक नदी (Bihar/Nepal): एक महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल।
- ब्यास संरक्षण रिजर्व (Punjab): यहाँ घड़ियालों का पुनरुद्धार कार्यक्रम चलाया गया है।
अस्तित्व के लिए प्रमुख खतरे:
- अवैध रेत खनन: यह उनके प्रजनन और घोंसला बनाने वाले क्षेत्रों (Sandbanks) को नष्ट कर देता है।
- मछली पकड़ने के जाल (Gillnets): घड़ियाल अक्सर इन जालों में फंसकर दम तोड़ देते हैं।
- जल प्रदूषण और नदी का सूखना: औद्योगिक अपशिष्ट और बांधों के निर्माण से प्राकृतिक प्रवाह (e-flow) बाधित होता है।
- प्राकृतिक आवास का विखंडन: बांधों और जलाशयों के कारण आबादी अलग-थलग पड़ जाती है।
संरक्षण के प्रयास:
- CCP: 1975 में भारत सरकार ने FAO और UNDP के सहयोग से मगरमच्छ संरक्षण परियोजना (Crocodile Conservation Project) शुरू की थी।
- रियर एंड रिलीज कार्यक्रम: अंडों को कृत्रिम रूप से सेया जाता है और 3 साल की उम्र होने पर उन्हें नदियों में छोड़ा जाता है।
- कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र (लखनऊ): एक महत्वपूर्ण प्रजनन केंद्र।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय मछुआरों को ‘वन्यजीव रक्षक’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

