NITI Aayog report on improving the efficiency of small and medium enterprises
संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग ने ‘Achieving Efficiencies in MSME Sector through Convergence of Schemes’ (योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से MSME क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करना) शीर्षक से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
अभिसरण की आवश्यकता क्यों?
भारत में MSME क्षेत्र GDP में लगभग 30%, विनिर्माण उत्पादन में 45% और निर्यात में 45-46% का योगदान देता है। इसके बावजूद, यह क्षेत्र कई चुनौतियों से जूझ रहे है:
- योजनाओं का विखंडन: वर्तमान में MSME मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों द्वारा कुल 18 योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें उद्देश्यों का दोहराव (Overlapping) है।
- संसाधनों की बर्बादी: एक ही लक्ष्य समूह के लिए कई मंत्रालयों की अलग-अलग योजनाओं के कारण प्रशासनिक खर्च बढ़ता है और संसाधनों का व्यय होता है।
- पहुँच में जटिलता: लाभार्थियों को अलग-अलग योजनाओं के लिए विभिन्न एजेंसियों के पास जाना पड़ता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
- बढ़ता बजट: सरकार का MSME बजट 2019-20 में ₹6,717 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹22,094 करोड़ हो गया है, जिससे इसके कुशल प्रबंधन की जरूरत और बढ़ गई है।
अभिसरण का दो-चरणीय दृष्टिकोण:
रिपोर्ट में अभिसरण के लिए दो मुख्य स्तंभ सुझाए गए हैं:
- सूचना अभिसरण (Information Convergence): केंद्र और राज्य सरकारों के डेटा को एक साथ एकीकृत करना। इसका उद्देश्य बेहतर निर्णय लेने और मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
प्रक्रिया अभिसरण (Process Convergence): समान उद्देश्यों वाली योजनाओं को आपस में मिलाना (Merging)। संचालन को सरल बनाना और सेवा वितरण में सुधार करना ताकि लाभार्थियों के लिए ‘Ease of Doing Business’ सुनिश्चित हो सके।
रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें:
रिपोर्ट में MSME पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने के लिए विशिष्ट सुझाव दिए गए हैं:
- AI-संचालित केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल: एक ऐसा एकीकृत मंच बनाने का प्रस्ताव है जो MSME योजनाओं, अनुपालन (Compliance), वित्त और बाजार संबंधी जानकारी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा। इसमें AI चैटबॉट और रीयल-टाइम डैशबोर्ड की सुविधा होगी।
- क्लस्टर विकास का एकीकरण: पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार की योजना (SFURTI) को क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) के साथ मिलाने का सुझाव दिया गया है ताकि शिल्प और लुप्तप्राय कलाओं का संरक्षण प्रभावी ढंग से हो सके।
- तीन-स्तरीय कौशल ढांचा (Three-tier Skill Structure): कौशल विकास पहलों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है—उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल, तकनीकी/डिजिटल कौशल, और ग्रामीण/महिला कारीगरों के लिए विशेष प्रशिक्षण।
- विपणन सहायता विंग (Marketing Assistance Wing): MSME उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने के लिए एक समर्पित विपणन विंग की स्थापना का सुझाव दिया गया है जो प्रदर्शनी, व्यापार मेलों और B2B आयोजनों में मदद करेगी।
- नवाचार और ऊष्मायन (Innovation & Incubation): कृषि-ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए ASPIRE योजना को ‘MSME Innovative’ पहल के अंतर्गत एक विशेष श्रेणी के रूप में एकीकृत करने की सिफारिश की गई है।
- प्रमुख योजनाओं का संरक्षण: PMEGP और ‘पीएम विश्वकर्मा’ (PM Vishwakarma) जैसी बड़ी योजनाओं को उनकी व्यापक आर्थिक महत्ता के कारण स्वतंत्र रखा जाना चाहिए।
- लक्षित पहल: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हब और उत्तर-पूर्व क्षेत्र (NER) के लिए विशेष पहलों की पहचान बरकरार रखी जानी चाहिए।

