India first state-funded Biosafety Level-4 laboratory
संदर्भ:
हाल ही में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला गुजरात के गांधीनगर में रखी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सुविधा का शिलान्यास किया, जो देश की स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव प्रौद्योगिकी क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) क्या है?
- परिचय: बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला सुरक्षा का उच्चतम स्तर है। यह उन घातक वायरस और बैक्टीरिया के साथ काम करने के लिए डिज़ाइन की गई है जिनका कोई ज्ञात टीका या उपचार नहीं है।
- सुरक्षा सूट: यहाँ वैज्ञानिक पॉजिटिव प्रेशर सूट (Positive Pressure Suits) पहनते हैं, जो उन्हें बाहरी हवा से पूरी तरह अलग रखते हैं और उन्हें ऑक्सीजन की आपूर्ति एक पाइप के माध्यम से की जाती है।
- हवा और पानी का शुद्धिकरण: लैब से निकलने वाली हवा को HEPA फिल्टर से साफ किया जाता है और अपशिष्ट जल को उच्च तापमान पर कीटाणुमुक्त किया जाता है ताकि कोई भी वायरस बाहर न फैल सके।
- नियंत्रण: ये प्रयोगशालाएं आमतौर पर आबादी से दूर या पूरी तरह सीलबंद इमारतों में होती हैं, जहाँ प्रवेश और निकास के लिए कड़े बायोमेट्रिक और एयरलॉक प्रोटोकॉल होते हैं।
गुजरात BSL-4 लैब की मुख्य विशेषताएं:
- वित्तपोषण: यह पूरी तरह से गुजरात सरकार द्वारा वित्तपोषित है, जो स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- तकनीकी क्षमता: यह प्रयोगशाला उभरते हुए ज़ूनोटिक (Zoonotic) रोगों और भविष्य की महामारियों की पहचान और उनके लिए टीके/दवाएं विकसित करने में सक्षम होगी।
- सहयोग: यह संस्थान राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और ICMR के साथ समन्वय में काम करेगा।
- एकीकृत परिसर: यह प्रयोगशाला एक ही स्थान पर BSL-4 (उच्चतम स्तर), BSL-3 (मध्यम से उच्च), और BSL-2 (मध्यम) स्तरों की सुविधाओं को उपलब्ध कराने में सक्षम है।
- BSL-4: यह सबसे खतरनाक वायरसों के अध्ययन के लिए सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है।
- BSL-3: यह हवा से फैलने वाले गंभीर रोगों के लिए डिज़ाइन की गई है और इसमें विशेष नियंत्रण (जैसे, नकारात्मक दबाव, HEPA फिल्टर) होते हैं।
- BSL-2: यह मध्यम जोखिम वाले रोगजनकों के लिए है और इसमें BSL-1 से अधिक सुरक्षा उपाय होते हैं।
- वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण: इसमें पशु सुरक्षा स्तर (ABSL-3/4) भी शामिल हैं, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच संबंधों को समझने में सहायक हैं।

