Kaziranga Elevated Corridor Project

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के नागांव जिले में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बुनियादी ढांचा पहलों में से एक है।
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के बारे मे:
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर असम में NH-715 (पुराना NH-37) पर प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है।
- उद्देश्य: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने वाले वाहनों के कारण होने वाली वन्यजीवों की मृत्यु को रोकना और मानसून के दौरान जानवरों को सुरक्षित गलियारा प्रदान करना।
- कुल लंबाई: लगभग 86 किलोमीटर।
- एलिवेटेड खंड: 35 किलोमीटर लंबा वन्यजीव-अनुकूल एलिवेटेड कॉरिडोर।
- लेन: मौजूदा दो-लेन सड़क को 4-लेन में बदला जाएगा।
- बाईपास: जखलाबंधा और बोकाखाट कस्बों के लिए 21 किलोमीटर का बाईपास खंड शामिल है।
- लागत: पूरी परियोजना की लागत करीब 6,957 करोड़ रुपये है।
- संचालन: परियोजना को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा निष्पादित किया जाएगा।
महत्व:
- पारिस्थितिक संरक्षण: काजीरंगा एक सींग वाले गैंडे, हाथियों और बाघों का निवास स्थान है। जब ब्रह्मपुत्र में बाढ़ आती है, तब जानवर दक्षिण में कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों की ओर जाते हैं। यह कॉरिडोर सड़क को ऊपर उठाकर जानवरों को नीचे से प्राकृतिक रूप से गुजरने का रास्ता देगा।
- पर्यावरण संतुलन: इसे भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की सिफारिशों और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें शोर को कम करने के लिए साउंड बैरियर और रात में जानवरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था जैसे उपाय किए जाएंगे।
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर मध्य असम को ऊपरी असम (डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया) और अरुणाचल प्रदेश से बेहतर ढंग से जोड़ेगा।
- पर्यटन: निर्बाध यातायात और वन्यजीव सफारी के आधुनिक अनुभव से स्थानीय युवाओं के लिए होमस्टे, गाइड और हस्तशिल्प के माध्यम से आय के नए स्रोत बनेंगे।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान:
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- भौगोलिक स्थिति: असम के गोलाघाट और नागांव जिलों में स्थित यह उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण और कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों के उत्तर में फैला है। यह ‘पूर्वी हिमालयी जैव विविधता हॉटस्पॉट’ के किनारे स्थित है।
- संरक्षण का इतिहास: 1905 में स्थापित इस उद्यान को 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। वर्ष 2006 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इसे बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा ‘महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र’ (IBA) भी माना गया है।
- प्रमुख जीव (Big Five): यह विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडों (Greater One-Horned Rhinoceros) का निवास स्थान है। इसके अलावा यहाँ एशियाई हाथी, रॉयल बंगाल टाइगर, जंगली भैंसा और दलदली हिरण पाए जाते हैं।
- संरक्षण स्थिति (Rhino):
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- IUCN: Vulnerable (सुभेद्य)।
- CITES: Appendix I।
- WPA 1972: Schedule I।
