Eco-sensitive zone declared around Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान के अरावली पर्वतमाला में स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर ‘पारिस्थितिकी-संवेदी क्षेत्र’ (Eco-Sensitive Zone – ESZ) घोषित करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
अधिसूचना के प्रमुख बिंदु:
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- सीमा और विस्तार: अभयारण्य की सीमा से 0 से 1 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 243 वर्ग किलोमीटर है।
- कानूनी आधार: यह अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत जारी की गई है।
- प्रभावित क्षेत्र: इस अधिसूचना के दायरे में तीन जिलों— राजसमंद, पाली और उदयपुर के कुल 94 गांव आएंगे।
- उत्तरी सीमा का अपवाद: उत्तर की ओर इसकी सीमा ‘शून्य’ रखी गई है क्योंकि वहां यह सीधे रावली-टॉडगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से सटा हुआ है।
- गतिविधियाँ: अधिसूचना के अनुसार, इस 1 किमी के दायरे में गतिविधियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
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- पूर्णतः प्रतिबंधित (Prohibited): वाणिज्यिक खनन और पत्थर उत्खनन, प्रदूषणकारी उद्योग और बड़े औद्योगिक उपक्रम, ईंट-भट्टों का संचालन और पवन चक्कियों (Windmills) की स्थापना, नए वाणिज्यिक होटल और रिसॉर्ट का निर्माण।
- विनियमित (Regulated): होटलों का विस्तार और पारिस्थितिक पर्यटन (Eco-tourism) गतिविधियाँ, पेड़ों की कटाई (सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के साथ), भूमि उपयोग में परिवर्तन (केवल अनिवार्य जनहित के लिए)।
- अनुमति प्राप्त (Permitted): स्थानीय समुदायों द्वारा की जाने वाली जैविक खेती और कृषि वानिकी, वर्षा जल संचयन और कुटीर उद्योग, स्थानीय निवासियों की आवासीय आवश्यकताएँ।
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- भावी रूपरेखा: अधिसूचना के अनुसार, राजस्थान सरकार को अगले दो वर्षों के भीतर स्थानीय लोगों और सरोकारों को ध्यान में रखते हुए एक आंचलिक मास्टर प्लान (Zonal Master Plan) तैयार करना होगा। इसके लिए ESZ निगरानी समिति का भी गठन किया गया है।
ESZ का महत्व:
- बफर जोन के रूप में कार्य: ईएसजेड ‘शॉक एब्जॉर्बर’ के रूप में कार्य करता है, जो उच्च संरक्षित क्षेत्रों (अभयारण्य) और बाहरी मानव गतिविधियों के बीच एक संक्रमणकालीन क्षेत्र प्रदान करता है।
- वन्यजीव गलियारा संरक्षण: यह वन्यजीवों के आवागमन के रास्तों को सुरक्षित करता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आती है।
- सतत विकास: यह स्थानीय समुदायों के लिए कौशल विकास और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका (जैसे एग्रोफोरेस्ट्री) को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य:
- अवस्थिति: यह राजस्थान के तीन जिलों— राजसमंद, पाली और उदयपुर में फैला हुआ है।
- क्षेत्रफल: लगभग 610 वर्ग किलोमीटर है। यह अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित भारत के महत्वपूर्ण जैव-विविधता क्षेत्रों में से एक है।
- वनस्पति: यहाँ मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं। धौक, खैर, सालर और चुरेल यहाँ की प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ हैं।
- कुंभलगढ़ किला: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘कुंभलगढ़ किला’ इसी अभयारण्य के भीतर स्थित है, जिसकी दीवार चीन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है।
- रणकपुर जैन मंदिर: अरावली की घाटियों में स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं।
पारिस्थितिक महत्व:
- नदी प्रणालियों का विभाजन: यह क्षेत्र बनास और लूणी नदी प्रणालियों के जलग्रहण क्षेत्रों के बीच एक प्राकृतिक विभाजक रेखा के रूप में कार्य करता है।
- जैव विविधता: यहाँ तेंदुए, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय, चौसिंगा और चिंकारा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। यह पेंटेड फ्रैंकोलिन (Painted Francolin) जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियों का भी घर है।
- प्रस्तावित टाइगर रिजर्व: इसे राजस्थान के छठे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरणों में है, जिसके लिए ईएसजेड अधिसूचना एक अनिवार्य कदम था।

