Most powerful solar radiation storm in 20 years

संदर्भ:
नासा के अनुसार जनवरी 2026 में सूर्य ने पिछले 20 वर्षों का सबसे शक्तिशाली सौर विकिरण तूफान (Solar Radiation Storm) उत्पन्न किया है, जो अब पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।
घटना का मुख्य विवरण:
- 19 जनवरी 2026 को सूर्य पर एक शक्तिशाली X-क्लास सौर ज्वाला (Solar Flare) और उसके साथ कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की घटना हुई।
- इसके परिणामस्वरूप एक विकिरण उत्पन्न हुई। इस उत्पन्न विकिरण तूफान को NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) ने S4 श्रेणी (Severe) का दर्जा दिया है।
- इससे पहले इस स्तर का तीव्र विकिरण तूफान अक्टूबर 2003 में देखा गया था। इस तूफान के दौरान आवेशित कण (Charged Particles) 1100 किमी/सेकंड से अधिक की गति से पृथ्वी की ओर आए।
- इस शक्तिशाली तूफान का एक सकारात्मक पहलू अरोरा बोरियालिस (Northern Lights) और अरोरा ऑस्ट्रालिस का अभूतपूर्व दृश्य था। 2026 के इस तूफान के कारण उत्तरी रोशनी को अमेरिका के कैलिफोर्निया और अलबामा जैसे दक्षिणी क्षेत्रों तक देखा गया, जो सामान्यतः केवल ध्रुवों के पास ही दिखाई देती है।
सौर विकिरण तूफान क्या है?
- सौर विकिरण तूफान तब होता है जब सूर्य पर होने वाले बड़े विस्फोट (जैसे सौर ज्वालाएं या CME) प्रोटॉन और अन्य परमाणु कणों को अत्यधिक उच्च गति (प्रकाश की गति के करीब) पर अंतरिक्ष में भेजते हैं।
- जब ये कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो ये वायुमंडल के ऊपरी परतों में प्रवेश कर जाते हैं। इन तूफानों को S-स्केल (S1 से S5) पर मापा जाता है, जिसमें S1 सबसे हल्का और S5 सबसे चरम (Extreme) होता है।
सौर चक्र 25 और वर्तमान स्थिति:
- सूर्य की गतिविधि लगभग 11 वर्षों के चक्र में चलती है। वर्तमान में हम सौर चक्र 25 (Solar Cycle 25) के चरम (Solar Maximum) चरण से गुजर रहे हैं।
- वैज्ञानिकों के अनुसार, 2024 के अंत से 2026 के मध्य तक का समय इस चक्र का सबसे सक्रिय काल है। यही कारण है कि 2024 (मई की सौर घटनाएँ) और अब जनवरी 2026 में इतने शक्तिशाली सौर तूफान देखे जा रहे हैं।
प्रभाव:
- अंतरिक्ष और उपग्रह प्रणाली: अत्यधिक ऊर्जावान प्रोटॉन उपग्रहों के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक्स को नुकसान पहुँचा सकते हैं। 2026 के इस तूफान के दौरान कई उपग्रहों को ‘सेफ मोड’ में रखा गया ताकि उनके सौर पैनल और सर्किट सुरक्षित रह सकें।
- संचार और नेविगेशन: तूफान के कारण आयनमंडल (Ionosphere) में विक्षोभ उत्पन्न होता है, जिससे उच्च आवृत्ति (HF) रेडियो संचार बाधित होता है। GPS सिग्नल वायुमंडल की परतों को पार करते समय विचलित हो जाते हैं।
- विमानन क्षेत्र: ध्रुवीय मार्गों (Polar Routes) पर उड़ने वाले विमानों के यात्रियों और चालक दल के लिए विकिरण का खतरा बढ़ जाता है। जनवरी 2026 की इस घटना के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदल दिए गए।
- विद्युत ग्रिड: यद्यपि विकिरण तूफान मुख्य रूप से कणों पर केंद्रित होते हैं, इनके साथ आने वाले भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storms) विद्युत ग्रिडों में प्रेरित धारा (Induced Currents) उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे ट्रांसफार्मर जल सकते हैं।
भारत का योगदान: आदित्य-L1
भारत का पहला सौर मिशन, आदित्य-L1, इस तूफान के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह मिशन पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी दूर ‘लैग्रेंज पॉइंट 1’ पर स्थित है, जहाँ से यह सूर्य पर होने वाली गतिविधियों पर निरंतर नज़र रखता है। इसरो (ISRO) द्वारा प्राप्त डेटा वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी करने और संभावित खतरों से बचने में मदद कर रहा है।
