China ballistic missile nuclear submarine Type 096
संदर्भ:
हाल ही में चीन ने अपनी अगली पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल परमाणु पनडुब्बी (SSBN), टाइप 096 (टैंग-क्लास) का अनावरण किया है। इसका अनावरण करके अपनी पनडुब्बी परमाणु क्षमता में सबसे महत्वपूर्ण उन्नयन किया है।
टाइप 096 टैंग-क्लास पनडुब्बी के बारे में:
टाइप 096 (टैंग-क्लास) पनडुब्बी चीन की अगली पीढ़ी की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है। यह अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में बड़ा, अधिक गुप्त और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है।
विशेषताएं:
- विस्थापन (Displacement): इसका जलमग्न विस्थापन 15,000 से 20,000 टन के बीच अनुमानित है, जो अमेरिकी नौसेना की ‘ओहियो-क्लास’ और आगामी ‘कोलंबिया-क्लास’ के बराबर है।
- स्टेल्थ तकनीक (Stealth Technology): टाइप 096 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘शांतता’ है। इसमें शाफ्टलेस रिम-ड्रिवन पंप-जेट प्रोपल्शन और राफ्ट-माउंटेड मशीनरी का उपयोग किया गया है, जो शोर को 100 डेसिबल से कम कर देता है।
- प्रोपल्शन: इसमें चौथी पीढ़ी के दबाव वाले जल-ठंडा परमाणु रिएक्टर (Pressurised Water-Cooled Nuclear Reactor) का उपयोग किया गया है, जो इसे महीनों तक जलमग्न रहने की असीमित रेंज और सहनशक्ति प्रदान करता है।
- मारक क्षमता: टाइप 096 की मारक क्षमता का मुख्य आधार JL-3 (Julang-3) पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है।
- रेंज: इसकी मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर से अधिक है। इसका मतलब है कि चीन अपने घरेलू सुरक्षित जल क्षेत्रों (Bastions) से ही अमेरिका के कई लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकता है।
- MIRV तकनीक: प्रत्येक मिसाइल कई स्वतंत्र रूप से लक्षित पुनः प्रवेश वाहनों (MIRVs) से लैस है, जो एक ही मिसाइल से कई शहरों या सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है।
सामरिक महत्व:
- विश्वसनीय निवारण: पुरानी टाइप 094 पनडुब्बियां शोर के कारण आसानी से पहचानी जा सकती थीं, लेकिन टाइप 096 के आने से चीन की ‘एश्योर्ड रिटेलिएशन’ (Assured Retaliation) क्षमता विश्वसनीय हो गई है।
- रणनीतिक समानता: चीन अब अमेरिका और रूस के साथ समुद्री परमाणु निवारण के क्षेत्र में “त्रिपक्षीय परमाणु प्रतिस्पर्धा” (Tripolar Nuclear Competition) में प्रवेश कर चुका है।
- A2/AD रणनीति: यह चीन की एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत में अमेरिकी और उसके सहयोगियों की नौसैनिक पहुंच को रोकना है।
भारत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर प्रभाव:
चीन की पनडुब्बियां अब हिंद महासागर में अधिक समय तक अदृश्य रहकर गश्त कर सकती हैं, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और मुख्य भूभाग पर परमाणु खतरा बढ़ गया है। इसके जवाब में, भारत (INS अरिघात और आगामी S4 श्रेणी की पनडुब्बियां) अपनी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विशेष जोर देंगे।

