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भारत में चींटी-मक्खियों की दो अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों की खोज (Two extremely rare species of ant-flies discovered in India) | Apni Pathshala

Two extremely rare species of ant-flies discovered in India

Two extremely rare species of ant-flies discovered in India

संदर्भ:

हाल ही में शोधकर्ताओं ने भारत में चींटी-मक्खियों (Ant Flies) की दो अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों की खोज की घोषणा की है। यह खोज दिल्ली के शहरी वन और तमिलनाडु के पश्चिमी घाटों में की गई है, जो भारत की जैव-विविधता के व्यापक विस्तार को दर्शाती है।

मुख्य विवरण और प्रजातियाँ:

ये नई प्रजातियाँ Microdontinae उप-परिवार (Syrphidae परिवार) से संबंधित हैं। इन्हें 100 से अधिक वर्षों के अंतराल के बाद भारत में इस समूह की पहली नई खोज माना जा रहा है।

  • Metadon ghorpadei (मेटाडॉन घोरपड़ेई):
      • स्थान: दिल्ली के उत्तरी रिज (Northern Ridge) वन क्षेत्र में खोजी गई।
      • विशेषताएँ: इसके एंटीना हल्के भूरे रंग के होते हैं, पैर पूरी तरह पीले और शरीर सुनहरे बालों से ढका होता है। इसका शरीर मध्यम आकार का है।
      • नामकरण: इसका नाम भारतीय मक्खी विशेषज्ञ डॉ. कुमार घोरपड़े के सम्मान में रखा गया है।
  • Metadon reemeri (मेटाडॉन रीमेरी):
    • स्थान: तमिलनाडु के सिरुवानी पहाड़ियों (Siruvani Hills), पश्चिमी घाट में खोजी गई।
    • विशेषताएँ: इसके एंटीना काले रंग के होते हैं और इसके पिछले पैरों का ऊपरी हिस्सा गहरा काला होता है। इसके पंख पारभासी होते हैं जिनमें विशिष्ट शिरा विन्यास पाया जाता है।
    • नामकरण: इसका नाम प्रसिद्ध डच कीटविज्ञानी मेननो रीमर (Menno Reemer) के नाम पर रखा गया हैं।

मर्मेकोफिली का पारिस्थितिक संबंध:

इन मक्खियों की सबसे अनूठी विशेषता इनका चींटियों के साथ संबंध है, जिसे मर्मेकोफिली कहा जाता है।

  • लार्वा चरण: इनके लार्वा चींटियों के घोंसलों के भीतर रहते हैं और चींटियों के बच्चों (brood) को खाकर जीवित रहते हैं।
  • वयस्क अवस्था: वयस्क मक्खियाँ शायद ही कभी फूलों पर जाती हैं और आमतौर पर चींटी कॉलोनियों के पास ही रहती हैं, जिससे उन्हें ढूंढना बहुत कठिन होता है।
  • नकल (Mimicry): ये मक्खियाँ डंक मारने वाले ततैया (wasps) की नकल करने में माहिर होती हैं, जो उन्हें शिकारियों से बचाता है।

संरक्षण स्थिति

चूंकि ये प्रजातियां केवल विशिष्ट चींटी समूहों के साथ ही जीवित रह सकती हैं, इसलिए निवास स्थान का विनाश (Habitat loss) इनके लिए सबसे बड़ा खतरा है। पश्चिमी घाट में वनों की कटाई और दिल्ली में शहरीकरण इनके अस्तित्व को संकट में डाल सकता है।

विशेष ध्यातव्य बिंदु:

  • वैज्ञानिक पद्धति: इन प्रजातियों की पहचान रूपात्मक (Morphological) और DNA विश्लेषण के माध्यम से की गई और इसके परिणाम अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका Zootaxa में प्रकाशित हुए हैं।
  • भारत की स्थिति: वर्तमान में दुनिया भर में Microdontinae की 454 प्रजातियाँ ज्ञात हैं, जिनमें से अब केवल 27 भारत में पाई जाती हैं।

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