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लोकसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रीय विधायी सूचकांक के गठन की घोषणा की (Lok Sabha Speaker announces formation of National Legislative Index) | UPSC

Lok Sabha Speaker announces formation of National Legislative Index

Lok Sabha Speaker announces formation of National Legislative Index

संदर्भ:

लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के दौरान ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index – NLI) के गठन करने की घोषणा की।  

राष्ट्रीय विधायी सूचकांक (National Legislative Index – NLI)

राष्ट्रीय विधायी सूचकांक एक प्रस्तावित डेटा-आधारित मूल्यांकन ढांचा है, जिसे विभिन्न विधायिकाओं की कार्यक्षमता, उत्पादकता, चर्चा की गुणवत्ता और डिजिटल सुधारों के आधार पर उन्हें रैंक करने के लिए विकसित किया जा रहा है।

उद्देश्य:

NLI का मुख्य लक्ष्य भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं: 

  • प्रदर्शन का मूल्यांकन: विधायिकाओं के कामकाज की गुणवत्ता, उत्पादकता और आउटपुट का वस्तुनिष्ठ मापन करना।
  • स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: राज्यों की विधानसभाओं के बीच एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की भावना पैदा करना।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण: ‘चर्चा और संवाद’ की संस्कृति को बढ़ावा देना और सदन में होने वाले व्यवधानों (Disruptions) को कम करना। 

मूल्यांकन के प्रमुख मानक:

NLI के तहत विधायिकाओं को निम्नलिखित मानकों के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी:

  • सदन की बैठकें: प्रति वर्ष बैठकों की कुल संख्या (न्यूनतम 30 बैठकों का लक्ष्य रखा गया है)।
  • चर्चा की गुणवत्ता: वाद-विवाद का स्तर और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर भागीदारी।
  • विधायी कार्य: पारित किए गए विधेयकों की संख्या और उन पर चर्चा के लिए दिया गया समय।
  • समिति प्रणाली: स्थायी समितियों (Standing Committees) का कामकाज और विधेयकों की उन तक पहुँच।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: विधायी प्रक्रियाओं में डिजिटलीकरण (जैसे e-Vidhan) और AI उपकरणों का समावेश।
  • अन्य: प्रश्नकाल का उपयोग, निजी संकल्प (Private Resolutions) और सरकारी आश्वासनों की पूर्ति। 

महत्व:

  • जवाबदेही: यह सूचकांक “चुनावों तक ही सीमित जवाबदेही” की जगह “निरंतर जवाबदेही” को सुनिश्चित करता है।
  • विधायी उत्पादकता: वर्तमान में राज्य विधानसभाओं की बैठकों का औसत काफी कम (20-25 दिन) है। यह सूचकांक इसे बढ़ाने और प्रभावी कानून बनाने की प्रक्रिया में सहायक होगा।
  • विकसित भारत @2047: यह विधायी प्रक्रियाओं को ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में संरेखित करने में सहायक होगा।
  • प्रौद्योगिकी एकीकरण: ‘एक राष्ट्र, एक विधायी मंच’ (One Nation, One Legislative Platform) की परिकल्पना को साकार करने में NLI महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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