Recommendation of steel slag road technology for Himalayan regions
संदर्भ:
हाल ही में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “वेस्ट टू वेल्थ” (कचरे से कंचन) मिशन के तहत स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी (SSRT) को पहाड़ी राज्यों, विशेषकर हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक टिकाऊ समाधान के रूप तेजी से अपनाने की सिफारिश की है।
स्टील स्लैग क्या हैं?
स्टील स्लैग स्टील निर्माण प्रक्रिया (जैसे बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस) के दौरान निकलने वाला एक ठोस औद्योगिक उप-उत्पाद है।
- संरचना: इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन और एल्युमीनियम के ऑक्साइड और सिलिकेट्स होते हैं।
- उत्पादन: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है, जहाँ प्रति वर्ष लगभग 1.9 करोड़ टन स्टील स्लैग निकलता है। यह आंकड़ा 2030 तक 6 करोड़ टन तक पहुँचने का अनुमान है।
- उपयोग: सड़क निर्माण, सीमेंट उत्पादन और कंक्रीट जैसे टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर उत्पादों के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के रूप में किया जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह तकनीक क्यों है महत्वपूर्ण?
- अत्यधिक स्थायित्व: पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन के कारण सड़कें जल्दी खराब होती हैं। स्टील स्लैग से बनी सड़कें पारंपरिक बिटुमेन (डामर) सड़कों की तुलना में तीन गुना अधिक टिकाऊ होती हैं और इनकी उम्र लगभग 10 वर्ष होती है।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: पहाड़ों में सड़क बनाने के लिए पत्थर और गिट्टी (aggregates) के लिए बड़े पैमाने पर अवैध खनन और वनों की कटाई होती है। स्टील स्लैग इसका 100% विकल्प बनकर प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाता है।
- लागत में कमी: इस तकनीक से सड़क निर्माण की लागत पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग 30% कम हो जाती है।
- उच्च भार वहन क्षमता: यह गिट्टी की तुलना में अधिक कठोर और मजबूत होती है, जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहाड़ी सड़कों पर भारी सैन्य वाहनों के आवागमन के लिए उपयुक्त है।
- पर्यावरण अनुकूल: यह औद्योगिक कचरे का बड़े पैमाने पर उपयोग सुनिश्चित कर लैंडफिल की समस्या को हल करती है और कार्बन फुटप्रिंट को कम करती है।
प्रमुख परियोजनाएं:
- सूरत मॉडल: भारत की पहली स्टील स्लैग सड़क का निर्माण गुजरात के सूरत (हजीरा) में किया गया था, जिसने इस तकनीक की सफलता को प्रमाणित किया।
- अरुणाचल प्रदेश (BRO): सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास जोराम-कोलोरियांग रोड पर 1 किलोमीटर का स्टील स्लैग स्ट्रेच सफलतापूर्वक बनाया है।
- NH-66: मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी इस तकनीक का प्रयोग किया गया है।
- ECOFIX: ECOFIX नामक एक ‘रेडी-टू-यूज़’ गड्ढा मरम्मत मिक्स लॉन्च किया गया है, जो स्टील स्लैग आधारित है और गीले या जलभराव वाले क्षेत्रों में भी सड़क मरम्मत में प्रभावी है।

