Indigenous long-range anti-ship hypersonic glide missile

संदर्भ:
DRDO द्वारा विकसित, भारत की अत्याधुनिक स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (HGV) LR-AShM इस बार 26 जनवरी 2026 की परेड में पहली बार दिखाई जाएगी।
LR-AShM क्या है?
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- Long Range Anti-Ship Missile (LRAShM) एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (Hypersonic Glide Missile) है, जिसे मुख्य रूप से भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी और युद्धपोतों के लिए विकसित किया गया है।
- यह “भविष्य के युद्ध” के लिए एक गेम-चेंजर है, जो दुश्मन के रडार को चकमा देने और जहाजों को नष्ट करने में सक्षम है।
- विकासकर्ता: Defence Research and Development Organisation (DRDO)
- मूल स्थान: DRDO (Advanced Systems Laboratory, Hyderabad)
- परीक्षण स्थिति: नवंबर 2024 में सफल उड़ान परीक्षण
- पहुंच: लगभग 1500 किमी
- गति: Mach 10 (ध्वनि की गति से 10 गुना तेज) तक, और औसतन Mach 5.0 (हाइपरसोनिक)
- प्रक्षेपवक्र (Trajectory): क्वासी-बैलिस्टिक (Quasi-Ballistic) – जो अत्यधिक पैंतरेबाज़ी (Maneuverable) करने में सक्षम है।
प्रमुख विशेषताएं:
- हाइपरसोनिक ग्लाइड तकनीक (HGV): यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद वायुमंडल में ग्लाइड करती है, जिससे इसकी गति और दिशा लगातार बदलती रहती है। यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में अधिक सटीक है।
- अदृश्यता और रडार से बचाव (Stealth): यह बहुत कम ऊंचाई पर और उच्च गति से उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार और हवाई रक्षा प्रणाली इसे समय पर ट्रैक नहीं कर पाते।
- मल्टी-स्किप: यह “स्किप-ग्लाइड” तकनीक का उपयोग करती है, जो मिसाइल को लंबी दूरी तक ले जाती है और टर्मिनल चरण (target के पास) में दिशा बदलने में मदद करती है।
- दो-चरण ठोस प्रणोदन: इसमें एक ठोस-ईंधन रॉकेट बूस्टर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जो इसे आवश्यक हाइपरसोनिक गति प्रदान करता है।
- स्वदेशी सेंसर: मिसाइल में स्वदेशी RF (रेडियो फ्रीक्वेंसी) सीकर का उपयोग किया गया है, जो चलते हुए जहाजों को सटीक रूप से निशाना बना सकता है।
महत्व:
- हिंद महासागर में वर्चस्व: 1,500 किमी की सीमा के साथ, यह मिसाइल भारत को हिंद महासागर के पूरे क्षेत्र में दुश्मन के युद्धपोतों (विशेषकर विमान वाहक) को निशाना बनाने की क्षमता देती है। यह चीन की ‘एक्सेस/एरिया डेनियल’ (A2/AD) क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
- आत्मनिर्भर भारत का प्रदर्शन: LR-AShM के साथ पूर्ण स्वदेशी एवियोनिक्स और गाइडिंग सिस्टम (Indigenous Avionics and Seeker) की मौजूदगी भारत की आत्मनिर्भरता (Self-reliance) की नीति को पुष्ट करती है। यह आयात निर्भरता को कम करता है।
- युद्धक क्षमता में बहुमुखी प्रतिभा: इसे न केवल तटीय बैटरी (Land-based) से, बल्कि भविष्य में नौसैनिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों (Submarine-launched) से भी लॉन्च किया जा सकता है।
