Dornier-228 aircraft equipped with new navigation system inducted into ICG
संदर्भ:
हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित दो उन्नत डॉर्नियर-228 विमानों को औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) में शामिल किया गया। ये विमान ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रमाण हैं, जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करते हैं।
डॉर्नियर-228 विमान के बारे में:
डॉर्नियर-228 एक बहु-भूमिका वाला, हल्का परिवहन और समुद्री निगरानी विमान है, जिसे मूलतः जर्मनी से लाइसेंस प्राप्त HAL द्वारा भारत में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
- ग्लास कॉकपिट (Glass Cockpit): विमान के पुराने एनालॉग मीटरों के स्थान पर आधुनिक डिजिटल डिस्प्ले लगाए गए हैं, जो पायलटों को उड़ान के दौरान बेहतर डेटा और स्पष्टता प्रदान करते हैं।
- मिशन मैनेजमेंट सिस्टम (MMS): यह प्रणाली रियल-टाइम खुफिया जानकारी जुटाने और विभिन्न डेटा स्रोतों को एकीकृत करने में मदद करती है।
- उन्नत सेंसर और एवियोनिक्स: इसमें समुद्री गश्ती रडार (Maritime Patrol Radar), इलेक्ट्रो-ऑप्टिक इंफ्रारेड (EO-IR) उपकरण और आधुनिक संचार प्रणालियाँ लगी हैं, जो रात और खराब मौसम में भी निगरानी को सटीक बनाती हैं।
- स्वदेशी सामग्री: इन विमानों में 75% से अधिक पुर्जे और प्रणालियाँ स्वदेशी हैं, जो रक्षा विनिर्माण में विदेशी निर्भरता को कम करती हैं।
- शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (STOL): यह छोटी और अर्ध-तैयार हवाई पट्टियों (unpaved strips) से भी उड़ान भर सकता है, जो इसे लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार जैसे दूरदराज के द्वीपों के लिए उपयुक्त बनाता है।
तटरक्षक बल के लिए परिचालन महत्व:
- विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी: भारत का लगभग 20.1 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ है। ये विमान समुद्र में अवैध गतिविधियों जैसे अवैध मछली पकड़ना (Poaching), मानव तस्करी और तस्करी को रोकने में सहायक होंगे।
- खोज और बचाव (Search and Rescue – SAR): समुद्र में संकटग्रस्त मछुआरों या जहाजों की पहचान करने और राहत पहुंचाने में डॉर्नियर की गति और संचार प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- समुद्री प्रदूषण नियंत्रण: तेल रिसाव (Oil Spill) जैसी पर्यावरणीय आपदाओं की निगरानी और नियंत्रण के लिए इन विमानों को विशेष उपकरणों से लैस किया जा सकता है।

