Indian Railways first indigenous humanoid robot ASC Arjun
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय रेलवे ने अपना पहला स्वदेशी ह्यूमनॉइड (मानवरूपी) रोबोट ‘ASC अर्जुन’ (ASC ARJUN) लॉन्च किया है। इसे विशेष रूप से विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर तैनात किया गया है, जो रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के आधुनिकीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट ‘ASC अर्जुन’:
- परिचय: ASC अर्जुन स्वदेशी रूप से विकसित एक मानव रूपी रोबोट है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का एक उन्नत मिश्रण है।
- विकास स्थल: इसे पूरी तरह से विशाखापत्तनम में RPF द्वारा स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) से विकसित किया गया है।
- नाम का महत्व: ‘अर्जुन’ नाम महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन की एकाग्रता और लक्ष्य-भेदन क्षमता से प्रेरित है।
प्रमुख विशेषताएं :
- घुसपैठ और संदिग्ध पहचान: यह रोबोट फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से लैस है, जो स्टेशन पर संदिग्ध व्यक्तियों या अपराधियों की पहचान कर सकता है। पहचान होने पर यह तुरंत IoT के माध्यम से RPF कंट्रोल रूम को रीयल-टाइम अलर्ट भेजता है।
- भीड़ प्रबंधन: AI की मदद से यह प्लेटफॉर्म पर भीड़ के घनत्व (Crowd Density) का विश्लेषण करता है। अत्यधिक भीड़ होने पर यह सुरक्षा कर्मियों को सूचित करता है ताकि भगदड़ जैसी स्थितियों को रोका जा सके।
- बहुभाषी उद्घोषणा: यह रोबोट हिंदी, अंग्रेजी और तेलुगु भाषाओं में यात्रियों को सुरक्षा संबंधी निर्देश और स्टेशन की जानकारी दे सकता है।
- स्वायत्त गश्त: यह प्लेटफॉर्म पर पूर्व-निर्धारित रास्तों पर सेमी-ऑटोनोमस तरीके से गश्त करता है। इसमें बाधाओं से बचने की क्षमता है, जिससे यह 24/7 निगरानी सुनिश्चित करता है।
- आपातकालीन सुरक्षा: इसमें आग और धुएं का पता लगाने वाले सेंसर लगे हैं, जो किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत चेतावनी जारी करते हैं।
- मानवीय अंतःक्रिया: यात्रियों के साथ विश्वास बनाने के लिए यह ‘नमस्ते’ जैसे सांस्कृतिक अभिवादन करता है और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को ‘सैल्यूट’ करता है।
भारतीय रेलवे की आधुनिकीकरण संबंधी अन्य पहलें:
- कवच (KAVACH): यह भारत की अपनी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है। यदि लोको पायलट ब्रेक लगाने में विफल रहता है, तो यह तकनीक स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देती है। यह ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
- कैप्टन अर्जुन (Captain ARJUN): ‘ASC अर्जुन’ से पहले, मध्य रेलवे (पुणे मंडल) ने ‘कैप्टन अर्जुन’ लॉन्च किया था। इसका उपयोग यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग, संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखने और प्लेटफॉर्म पर गश्त के लिए किया जाता है।
- ‘उस्ताद’ (USTAAD) रोबोट: इसका पूरा नाम ‘Undergear Surveillance Through Artificial Intelligence Assisted Droid’ है। यह रोबोट चलती ट्रेन के नीचे (Undergear) के हिस्सों के वीडियो और तस्वीरें लेकर खराबी का पता लगाता है।
- आरटीआइएस (RTIS – Real-Time Train Information System): इसरो (ISRO) के सहयोग से विकसित यह प्रणाली ट्रेनों की रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैक करती है। यात्री National Train Enquiry System (NTES) के माध्यम से अपनी ट्रेन की सटीक स्थिति जान सकते हैं।

