Hi-tech rescue center to be built in Alwar Biological Park
संदर्भ:
राजस्थान के अलवर स्थित बायोलॉजिकल पार्क (काटी घाटी क्षेत्र) में गिर राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर एक अत्याधुनिक पशु बचाव केंद्र (Rescue Centre) और एक हाईटेक पशु चिकित्सालय स्थापित किया जाएगा।
अलवर बायोलॉजिकल पार्क:
- अवस्थिति: यह जैविक उद्यान अलवर-जयपुर मार्ग पर ‘कटी घाटी’ क्षेत्र में लगभग 100 हेक्टेयर (250 एकड़) भूमि पर फैला हुआ है।
- संरचना: पार्क के कुल क्षेत्रफल का 30% हिस्सा चिड़ियाघर (Zoo) के रूप में और शेष 70% हिस्सा प्राकृतिक वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
- वन्यजीव विविधता: यहाँ 81 विभिन्न प्रजातियों के 400 से अधिक वन्यजीव निवास करेंगे। इसमें भारत में पाई जाने वाली बाघों की सात प्रजातियों के अलावा शेर और चीते भी शामिल हैं।
- विशेष आकर्षण: अफ्रीका से लाए गए जिराफ और एक भव्य बटरफ्लाई पार्क (तितली उद्यान) इस पार्क की विशिष्ट पहचान होगी।
- संचालन: राजस्थान वन विभाग द्वारा सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के सहयोग से किया जाएगा।
- स्थानांतरण: पार्क के लिए देश भर के 25 विभिन्न चिड़ियाघरों से वन्यजीवों को लाया जाएगा।
अत्याधुनिक संरक्षण सुविधाएं:
- हाई-टेक रेस्क्यू सेंटर (गिर मॉडल): गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर यहाँ एक उन्नत पशु बचाव केंद्र बनाया जाना है।
- पशु चिकित्सालय: पार्क के भीतर एक आधुनिक सुविधाओं से लैस पशु चिकित्सा अस्पताल होगा, जहाँ वन्यजीव चिकित्सकों की एक समर्पित टीम 24×7 तैनात रहेगी।
- त्रिकोणीय सफारी: यह क्षेत्र का पहला ऐसा स्थान होगा, जहाँ पर्यटक एक ही परिसर में लॉयन सफारी, टाइगर सफारी और शाकाहारी पशु सफारी का अनुभव कर सकेंगे।
पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व:
- नमो बायोडायवर्सिटी पार्क (Namo Van): इसी क्षेत्र के समीप प्रताप बांध पर राजस्थान का पहला ‘नमो बायोडायवर्सिटी पार्क’ भी विकसित किया गया है, जो क्षेत्र के “ग्रीन लंग्स” (Green Lungs) के रूप में कार्य करता है।
- रोजगार सृजन: इस परियोजना से अलवर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- शिक्षा और अनुसंधान: यह पार्क स्कूली छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का एक जीवंत प्रयोगशाला बनेगी।

