Government issues notification of Environment Fund Rules 2026
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने पर्यावरण (संरक्षण) कोष नियम, 2026 (Environmental Protection Fund Rules, 2026) को अधिसूचित किया है। यह कदम भारत के पर्यावरण प्रशासन में एक “प्रतिस्थापनकारी” बदलाव का संकेत है, जहाँ दंड के रूप में वसूली गई राशि का उपयोग पर्यावरण सुधार के लिए किया जाएगा।
पर्यावरण (संरक्षण) कोष नियम, 2026 के मुख्य बिंदु:
ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 25 के तहत जारी किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर लगाए गए जुर्माने को सीधे पारिस्थितिक सुधार और निगरानी प्रणालियों में निवेश करना है।
- कोष का कानूनी आधार: इस कोष का प्रावधान पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 में पहले से था, लेकिन इसे जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से पुनः पुष्ट किया गया है, जिसने कई छोटे पर्यावरणीय अपराधों को गैर-आपराधिक बनाकर उनके बदले भारी मौद्रिक दंड का प्रावधान किया।
- कोष का स्रोत: इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिनियमों के तहत लगाए गए दंड जमा होंगे: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
- राजस्व साझाकरण मॉडल: नियमों के तहत केंद्र और राज्यों के बीच दंड राशि के वितरण का एक पारदर्शी फॉर्मूला तय किया गया है:
- 75% हिस्सा: संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संचित कोष (Consolidated Fund) में स्थानांतरित किया जाएगा।
- 25% हिस्सा: केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर की हरित पहलों के लिए रखा जाएगा।
- अनुमत गतिविधियां: कोष का उपयोग विशेष रूप से 11 चिन्हित गतिविधियों के लिए किया जा सकता है:
- प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और शमन के उपाय।
- दूषित और खराब हो चुके पर्यावरणीय स्थलों का उपचार (Remediation)।
- पर्यावरण निगरानी उपकरणों (वायु, जल, शोर) की स्थापना और रखरखाव।
- स्वच्छ तकनीकों पर अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना।
- नियामक निकायों (जैसे CPCB, SPCB) की संस्थागत और तकनीकी क्षमता का निर्माण।
- न्यायालयों या न्यायाधिकरणों (Tribunals) द्वारा निर्देशित अध्ययन या कार्य।
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- प्रतिबंधात्मक सूची: यह सुनिश्चित करने के लिए कि धन का दुरुपयोग न हो, कुछ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है:
- चिकित्सा व्यय, विदेश यात्रा, या सरकारी कार्यालयों/आवासों का निर्माण।
- कार्यालय उपकरण जैसे एसी, जनरेटर, वाहन या फर्नीचर की खरीद।
- प्रशासनिक व्यय: कोष के प्रबंधन पर खर्च होने वाली राशि को कुल कोष के 5% तक सीमित किया गया है।
- प्रतिबंधात्मक सूची: यह सुनिश्चित करने के लिए कि धन का दुरुपयोग न हो, कुछ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है:
- प्रशासनिक और डिजिटल ढांचा:
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- परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU): केंद्र और राज्य स्तर पर समर्पित PMU बनाए जाएंगे, जिनका नेतृत्व संयुक्त सचिव या राज्य सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।
- ऑनलाइन पोर्टल: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक समर्पित पोर्टल विकसित करेगा, जो दंड भुगतान, फंड आवंटन और वास्तविक समय की निगरानी के लिए एकल इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा।
- लेखापरीक्षा (Audit): भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा कोष का नियमित ऑडिट किया जाएगा और रिपोर्ट संसद एवं राज्य विधानसभाओं में रखी जाएगी।
महत्व:
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): यह नियम “प्रदूषण के लिए भुगतान” को “प्रदूषण के सुधार के लिए भुगतान” में बदलकर इस सिद्धांत को और मजबूत करते हैं।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): 75:25 का वितरण मॉडल राज्यों को स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सशक्त बनाता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: CAG ऑडिट और डिजिटल पोर्टल भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करते हैं और “ग्रीन गवर्नेंस” को बढ़ावा देते हैं।
- अपराधमुक्त करने का प्रभाव (Decriminalization): जन विश्वास अधिनियम के साथ मिलकर, ये नियम पर्यावरण अनुपालन को जेल की सजा के बजाय आर्थिक दंड और बहाली के माध्यम से प्रभावी बनाते हैं।

