World Economic Forum Chief Economists Outlook report
संदर्भ:
हाल ही में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) द्वारा ‘Chief Economists Outlook’ रिपोर्ट जारी की गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस रिपोर्ट में भू-राजनीतिक और तकनीकी बदलावों के बीच उभरते नए वैश्विक आर्थिक ढांचे का विश्लेषण किया गया है।
WEF की ‘Chief Economists Outlook’ रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
- वैश्विक मंदी की आशंका: रिपोर्ट के अनुसार, 53% मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी। हालांकि, सितंबर 2025 (72%) की तुलना में इस धारणा में सुधार हुआ है।
- विकास दर का अनुमान: 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3.1% के आसपास रहने का अनुमान है।
- सार्वजनिक ऋण का बढ़ता बोझ: दुनिया भर में कर्ज (Debt) का स्तर ऐतिहासिक रूप से बढ़ गया है। कर्ज-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP ratio) 95% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सरकारों के पास शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करने की क्षमता कम हो गई है।
- भू-आर्थिक टकराव: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव, प्रौद्योगिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (Regional Trade Agreements) की ओर झुकाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है।
- क्षेत्रीय परिदृश्य:
- भारत (South Asia): रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया और विशेष रूप से भारत का विकास परिदृश्य सबसे मजबूत है। IMF के अनुसार भारत की 2026 की विकास दर 6.4% अनुमानित है। भारत जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ($4.3 ट्रिलियन) बना है।
- अमेरिका (US): AI में भारी निवेश के कारण अमेरिका में विकास की संभावनाएं सकारात्मक हैं, हालांकि वहां परिसंपत्ति बुलबुले (Asset Bubbles) का जोखिम भी बना हुआ है।
- चीन (China): चीन वर्तमान में अपस्फीति (Deflation) और ऋण संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
- यूरोप (Europe): कमजोर विकास और भू-आर्थिक चुनौतियों के कारण यूरोप का प्रदर्शन सुस्त रहने की आशंका है।
Chief Economists Outlook रिपोर्ट के बारे मे:
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ‘Chief Economists Outlook’ रिपोर्ट वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा का विश्लेषण करने वाला एक प्रमुख रणनीतिक दस्तावेज है।
- यह रिपोर्ट एक त्रैमासिक (Quarterly) सर्वेक्षण है। यह ‘अनुमानों और दृष्टिकोण’ पर आधारित रिपोर्ट है।
- इसमें दुनिया के शीर्ष बहुराष्ट्रीय निगमों (MNCs), निवेश बैंकों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों (जैसे IMF, विश्व बैंक) के मुख्य अर्थशास्त्रियों के विचारों को संकलित किया जाता है।
- इस रिपोर्ट की शुरुआत विश्व आर्थिक मंच के ‘Centre for the New Economy and Society’ द्वारा की गई थी। यह ‘Chief Economists Survey’ पर आधारित होती है।
- यह रिपोर्ट केवल GDP तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाता है:
- क्षेत्रीय विश्लेषण: अमेरिका, चीन, यूरोप, भारत और अन्य उभरते बाजारों का तुलनात्मक अध्ययन।
- नीतिगत बदलाव: केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों का वैश्विक प्रभाव।
- भू-राजनीति और अर्थशास्त्र: यह ‘Geoeconomics’ पर विशेष जोर देती है कि कैसे युद्ध या राजनीतिक तनाव व्यापार को प्रभावित करते हैं।

