Foundation stone laid for ₹450 crore Matabari Tourism Circuit
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) और संचार मंत्री ने त्रिपुरा के गोमती जिले में ₹450 करोड़ की लागत वाले महत्वाकांक्षी ‘माताबाड़ी पर्यटन सर्किट’ (Matabari Tourism Circuit) की आधारशिला रखी। यह परियोजना ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना का हिस्सा है।
माताबाड़ी पर्यटन सर्किट के बारे मे:
माताबाड़ी पर्यटन सर्किट (Matabari Tourism Circuit) त्रिपुरा के पर्यटन और आर्थिक ढांचे को बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।
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- आधारशिला: 25 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा।
- कुल लागत: ₹450 करोड़ (इसमें से ₹276 करोड़ DoNER मंत्रालय द्वारा ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत वित्त पोषित हैं)।
- प्रमुख स्तंभ:
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- त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (माताबाड़ी): 51 शक्तिपीठों में से एक, जो आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र है।
- डंबूर झील (नारकेल कुंज): यहाँ जल-क्रीडा और ईको-रिसॉर्ट्स विकसित किए जा रहे हैं।
- छबीमुरा: गोमती नदी के किनारे चट्टानों पर उकेरी गई मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध (त्रिपुरा का अमेज़न)।
- नीरमहल: रुद्रसागर झील के बीच स्थित जल-महल।
- सिपाहीजाला अभयारण्य: जैव-विविधता और ‘क्लाउडेड लेपर्ड’ के लिए प्रसिद्ध।
महत्व:
- रोजगार सृजन: इस परियोजना से लगभग 4,000 से 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
- महिला भागीदारी: योजना में महिलाओं की 30% भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
- कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण अनुभव मिल सके।
- ‘एक्ट ईस्ट’ नीति: त्रिपुरा को “दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार” कहा गया है। माताबाड़ी सर्किट का विकास ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती देता है, जिससे पड़ोसी देशों के पर्यटकों के लिए भी त्रिपुरा एक आकर्षक केंद्र बनेगा।
- पारिस्थितिकी पर्यटन: डंबूर झील क्षेत्र में फ्लोटिंग जेटी, ईको-फ्रेंडली रिसॉर्ट्स और नेचर ट्रेल्स का विकास किया जा रहा है। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।

