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राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक 2026 (Rajasthan Disturbed Areas Bill 2026) | UPSC

Rajasthan Disturbed Areas Bill 2026

Rajasthan Disturbed Areas Bill 2026

संदर्भ:

हाल ही में राजस्थान सरकार ने ‘राजस्थान अशांत क्षेत्र (अचल संपत्ति के हस्तांतरण का निषेध और परिसर से किरायेदारों के बेदखली से संरक्षण) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी है। 21 जनवरी, 2026 को कैबिनेट द्वारा स्वीकृत यह विधेयक आगामी बजट सत्र में पेश किया जाएगा। 

राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक, 2026 के मुख्य प्रावधान:

  • अशांत क्षेत्र की घोषणा: सरकार सांप्रदायिक हिंसा, दंगों या “अनुचित संकुलन” (improper clustering) के कारण जनसांख्यिकीय असंतुलन वाले क्षेत्रों को ‘अशांत’ घोषित कर सकती है।
  • संपत्ति हस्तांतरण पर नियंत्रण: अधिसूचित क्षेत्रों में अचल संपत्ति (घर, दुकान, भूमि) का हस्तांतरण जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं होगा। बिना अनुमति के किया गया कोई भी सौदा ‘शून्य’ (null and void) माना जाएगा।
  • किरायेदारों का संरक्षण: दंगों या अशांति के दौरान किरायेदारों को जबरन बेदखली से बचाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
  • दंडात्मक प्रावधान: इस कानून का उल्लंघन एक संज्ञेय (cognisable) और गैर-जमानती अपराध होगा। इसमें 3 से 5 वर्ष की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
  • अवधि: अशांत क्षेत्र की घोषणा प्रारंभ में एक वर्ष के लिए होगी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जा सकता है। 

सरकार का तर्क:

  • डिस्ट्रेस सेल (Distress Sale) पर रोक: सांप्रदायिक तनाव के दौरान भय या असुरक्षा के कारण लोग अपनी संपत्तियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। यह कानून ऐसी जबरन बिक्री को रोकने का प्रयास है।
  • सांप्रदायिक सद्भाव: सरकार का मानना है कि जनसंख्या के स्वरूप में अचानक बदलाव (demographic change) से सामाजिक ताना-बाना बिगड़ता है, जिसे विनियमित करना शांति के लिए आवश्यक है।

 संवैधानिक एवं विधिक चुनौतियां:

  • यह विधेयक ‘गुजरात मॉडल’ (गुजरात अशांत क्षेत्र अधिनियम, 1991) पर आधारित है, जो लंबे समय से न्यायिक विवादों में रहा है। इसके प्रमुख संवैधानिक पहलू निम्नलिखित हैं: 
    • अनुच्छेद 14 और 15 (समानता का अधिकार): आलोचकों का तर्क है कि ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ जैसे शब्द अस्पष्ट हैं और इनका उपयोग विशेष समुदायों को लक्षित करने के लिए किया जा सकता है, जो धर्म के आधार पर भेदभाव न करने के सिद्धांत के विरुद्ध है।
    • अनुच्छेद 19(1)(e) (निवास की स्वतंत्रता): भारत के किसी भी हिस्से में बसने के अधिकार पर इस प्रकार का प्रतिबंध ‘तर्कसंगतता’ (reasonableness) की कसौटी पर परखा जाएगा।
    • अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार): यद्यपि यह अब मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति बेचने से रोकना कानूनी प्रक्रिया के उचित पालन और सार्वजनिक हित के बिना चुनौतीपूर्ण है।
    • संघवाद (Federalism): लोक व्यवस्था (Public Order) राज्य सूची का विषय है, लेकिन संपत्ति हस्तांतरण समवर्ती सूची का हिस्सा है। इसलिए इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है।

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