Uniform Civil Code Amendment Ordinance 2026 implemented in Uttarakhand
संदर्भ:
हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने राज्य में ‘समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश, 2026’ को लागू कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति के बाद इसे तत्काल प्रभाव से प्रभावी कर दिया गया है।
अध्यादेश का मुख्य उद्देश्य:
संशोधन अध्यादेश 2026 का प्राथमिक लक्ष्य मूल कानून की विसंगतियों को दूर करना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और दंड के प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके माध्यम से कानून को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
- अब ‘आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973’ के स्थान पर ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023’ को लागू किया गया है।
- दंड के प्रावधानों के लिए ‘भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860’ की जगह ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023’ का संदर्भ दिया गया है।
प्रमुख संशोधन और प्रावधान:
- विवाह निरस्तीकरण का नया आधार: अब यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर या गलत जानकारी देकर विवाह करता है, तो इसे विवाह निरस्त करने का एक वैध आधार माना जाएगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती: लिव-इन संबंधों में बल, धोखाधड़ी या पहचान छिपाने जैसे कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही, लिव-इन संबंध समाप्त होने पर अब पंजीयक (Registrar) द्वारा ‘समाप्ति प्रमाण पत्र’ जारी करना अनिवार्य होगा।
- सक्षम प्राधिकारी में बदलाव: धारा 12 के तहत अब ‘सचिव’ के स्थान पर ‘अपर सचिव’ को सक्षम प्राधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
- शब्दावली में सुधार: अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर ‘जीवनसाथी’ (Spouse) शब्द का उपयोग किया गया है, जो लैंगिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- अपीलीय तंत्र: यदि उप-पंजीयक (Sub-Registrar) समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं करता है, तो प्रकरण स्वतः ही वरिष्ठ अधिकारियों (पंजीयक और पंजीयक जनरल) को अग्रेषित हो जाएगा।
संवैधानिक परिप्रेक्ष्य:
- अनुच्छेद 213: राज्यपाल ने इस अध्यादेश को संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी किया है।
- अनुच्छेद 44: यह पहल भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के तहत अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है।
- छूट: मूल अधिनियम की तरह ही, यह संशोधित अध्यादेश भी उत्तराखंड की अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होगा।
प्रभाव:
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने सफलतापूर्वक UCC लागू किया और अब एक वर्ष के अनुभवों के आधार पर उसमें सुधार भी किए हैं। यह अन्य राज्यों के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ के रूप में कार्य करेगा जो अपने यहाँ व्यक्तिगत कानूनों में सुधार की योजना बना रहे हैं।

