World largest compressed-air energy storage plant opens in China

संदर्भ:
हाल ही में चीन ने दुनिया के सबसे बड़े कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (CAES) संयंत्र का संचालन शुरू किया है। यह संयंत्र चीन की ऊर्जा सुरक्षा के साथ ही वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
चीन के कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (CAES) संयंत्र के बारे में:
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- स्थान: यह विशाल संयंत्र पूर्वी चीन के जियांग्सू (Jiangsu) प्रांत में स्थित है।
- प्रोजेक्ट का नाम: गुओक्सिन सुयान हुआन (Guoxin Suyan Huai’an) साल्ट कैवर्न CAES प्रोजेक्ट
- संचालक/निर्माता: हार्बिन इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन (Harbin Electric Corp)
- क्षमता: संयंत्र की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 600 मेगावाट (MW) है और इसकी भंडारण क्षमता 2,400 मेगावाट-घंटा (MWh) है।
- दक्षता: इस संयंत्र की ऊर्जा रूपांतरण दक्षता लगभग 71% है, जो CAES तकनीक में दुनिया में अग्रणी है।
- तकनीक: इस संयंत्र में गैर-दहन या एडियाबेटिक CAES तकनीक का उपयोग किया गया है।
- शून्य उत्सर्जन: इसमें बिजली उत्पादन के दौरान प्राकृतिक गैस या जीवाश्म ईंधन जलाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होता है।
- प्रभाव: यह संयंत्र सालाना लगभग 6 लाख घरों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
CAES संयंत्र कैसे काम करता है?
कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज (CAES) को अक्सर “एयर पावर बैंक” के रूप में जाना जाता है। इसकी कार्यप्रणाली दो चरणों में पूरी होती है:
- भंडारण (Compression): जब बिजली की मांग कम होती है (जैसे रात के समय), तो अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके हवा को कंप्रेस किया जाता है और उसे विशाल भूमिगत नमक की गुफाओं (Salt Caverns) में उच्च दबाव पर जमा किया जाता है।
- उत्पादन (Expansion): जब बिजली की मांग चरम पर होती है, तो इस संपीड़ित हवा को छोड़ा जाता है। यह हवा टर्बाइन को घुमाती है, जिससे बिजली पैदा होती है और ग्रिड को आपूर्ति की जाती है।
महत्व:
- नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: यह सौर और पवन ऊर्जा के दीर्घकालिक भंडारण तकनीक ग्रिड को स्थिरता प्रदान करती है।
- 2027 का लक्ष्य: चीन ने 2027 तक 180 गीगावाट (GW) से अधिक नई ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
- संसाधनों का पुनर्चक्रण: इससे भूमि धंसने जैसी भूगर्भीय समस्याओं को कम करने में भी मदद मिलती है।
- पर्यावरणीय लाभ: सालाना लगभग 2.7 लाख टन मानक कोयले की बचत और 5.2 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
