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मशरूम की नई प्रजाति हेमिलेसिनम इंडिकम की खोज (New mushroom species Hemileccinum indicum discovered) | Ankit Avasthi Sir

New mushroom species Hemileccinum indicum discovered

New mushroom species Hemileccinum indicum discovered

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में मशरूम की एक नई प्रजाति ‘हेमिलेसिनम इंडिकम’ (Hemileccinum indicum) की पहचान की है। 

खोज की पृष्ठभूमि:

  • खोजकर्ता: यह खोज भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), सेंट जेवियर्स कॉलेज (झारखंड) और इटली के टोरिनो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम द्वारा की गई है।
  • मुख्य शोधकर्ता: डॉ. कनाड दास (Kanad Das) और अनिकेत घोष इस अध्ययन के प्रमुख सदस्य हैं।
  • स्थान: यह मशरूम उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित धकुरी क्षेत्र के समशीतोष्ण वनों (Temperate Forests) में पाया गया है।
  • ऊंचाई: यह मशरूम समुद्र तल से लगभग 2,600 मीटर की ऊंचाई पर खोजा गया है। 
  • पुष्टि की विधि: शोधकर्ताओं ने इसकी पहचान की पुष्टि के लिए मल्टीजीन मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक विश्लेषण का उपयोग किया।

हेमिलेसिनम इंडिकम की विशेषताएं:

  • प्रकार: ‘हेमिलेसिनम इंडिकम’ एक बोलेट मशरूम है। बोलेट्स की मुख्य विशेषता यह होती है कि इनकी टोपी के नीचे गिल्स के बजाय छोटे छिद्र (Pores) होते हैं।
  • नाम का अर्थ: प्रजाति का नाम ‘इंडिकम’ (indicum) लैटिन शब्द से लिया गया है, जो भारत को संदर्भित करता है।
  • जीनस (Genus): यह ‘हेमिलेसिनम’ जीनस से संबंधित है। भारत में इस जीनस का यह पहला आधिकारिक रिकॉर्ड है।
  • रंग: इसकी टोपी का रंग शुरू में बैंगनी-भूरा होता है जो परिपक्व होने पर चमड़े जैसा भूरा हो जाता है। 
  • बनावट: इसमें टोपी की सतह झुर्रीदार होती है। छिद्रों की सतह हल्के पीले रंग की होती है, जो चोट लगने या रगड़ने पर अपना रंग नहीं बदलती है।
  • बीजाणु (Spores): इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) के तहत जांच करने पर इसके बीजाणुओं पर छोटे और जटिल गड्ढे (Pits) पाए गए हैं। 
  • तना (Stipe): इसका तना चिकना होता है, जबकि इस समूह की अन्य प्रजातियों में अक्सर रेशेदार या पपड़ीदार तने पाए जाते हैं।

 

पारिस्थितिक महत्व:

  • एक्टोमाइकोरिज़ल संबंध: यह मशरूम ओक (Quercus/बाँज) के पेड़ों की जड़ों के साथ एक सहजीवी संबंध बनाता है।
  • पोषक तत्व विनिमय: इस सहजीविता के माध्यम से मशरूम पेड़ को मिट्टी से पानी और पोषक तत्व (विशेषकर फास्फोरस और नाइट्रोजन) अवशोषित करने में मदद करता है।
  • वन स्वास्थ्य: ये मशरूम जंगल के पोषक चक्र को बनाए रखने और पेड़ों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • पारिस्थितिकी: मशरूम केवल खाद्य पदार्थ नहीं हैं, बल्कि वे पारिस्थितिकी तंत्र के ‘अपघटक’ (Decomposers) के रूप में कार्य करते हैं।

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