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संयुक्त राज्य अमेरिका में ध्रुवीय भंवर का प्रकोप (Polar vortex outbreak in the United States) | UPSC Preparation

Polar vortex outbreak in the United States

Polar vortex outbreak in the United States

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में विनाशकारी शीतकालीन तूफान आया, 26 जनवरी 2026 तक इस तूफान के कारण कम से कम 50 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। विनाशकारी शीतकालीन तूफान के लिए ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) को मुख्य कारक माना जा रहा है।

ध्रुवीय भंवर’ (Polar Vortex) क्या हैं?

  • ध्रुवीय भंवर पृथ्वी के दोनों ध्रुवों (आर्कटिक और अंटार्कटिक) के ऊपर स्थित निम्न वायुदाब और अत्यधिक ठंडी हवा का एक विशाल चक्र है। 
  • यह कोई सतह पर आने वाला तूफान नहीं है, बल्कि वायुमंडल की ऊपरी परतों (मध्य-क्षोभमंडल से समतापमंडल तक) में स्थित एक स्थायी चक्रीय परिसंचरण है। 
  • इसका नाम ‘भंवर’ इसलिए पड़ा क्योंकि यह एक चक्रवात की तरह घड़ी की सुई के विपरीत दिशा (उत्तरी गोलार्ध में) में घूमता है, जो ठंडी हवा को ध्रुवों पर केंद्रित रखता है।

कारक:

  • कोरिओलिस बल (Coriolis Force): पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न बल हवा को ध्रुवों के चारों ओर घुमाता है।
  • तापमान प्रवणता (Temperature Gradient): ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रों और गर्म उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के बीच तापमान का भारी अंतर इस भंवर को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • जेट स्ट्रीम (Jet Stream): ध्रुवीय भंवर की बाहरी सीमा पर ‘पोलर नाइट जेट’ (Polar Night Jet) चलती है, जो इसे बांधकर रखती है।

विशेषताएं:

  • मौसमी परिवर्तनशीलता: यह सर्दियों में सबसे अधिक शक्तिशाली और विस्तृत होता है, जबकि गर्मियों में यह काफी कमजोर और संकुचित हो जाता है।
  • ऊंचाई: यह लगभग 10 किमी से 50 किमी की ऊंचाई (समताप मंडल) तक फैला होता है।
  • विखंडन की प्रवृत्ति: जब यह कमजोर होता है, तो यह कई ‘लोब्स’ (Lobes) या छोटे केंद्रों में टूट सकता है, जो दक्षिण की ओर खिसक जाते हैं।

कार्यप्रणाली:

  • मजबूत भंवर (Strong Vortex): जब भंवर की गति तेज होती है, तो यह आर्कटिक की ठंडी हवा को एक घेरे में कैद रखता है। इस स्थिति में जेट स्ट्रीम सीधी और मजबूत होती है, जिससे मध्य अक्षांशों (जैसे अमेरिका, यूरोप) में मौसम सामान्य रहता है।
  • कमजोर भंवर (Weak Vortex): जब समताप मंडल में अचानक गर्मी बढ़ती है (Sudden Stratospheric Warming), तो भंवर की गति धीमी हो जाती है। परिणामतः, जेट स्ट्रीम ‘लहरदार’ (Meandering) हो जाती है। यह ठंडी हवा को दक्षिण की ओर और गर्म हवा को उत्तर की ओर जाने का रास्ता दे देती है।

प्रभाव:

  • भीषण शीत लहर (Extreme Cold Waves): इसके टूटने से अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया के देशों में अचानक तापमान -30°C से -50°C तक गिर जाता है।
  • ओजोन रिक्तीकरण (Ozone Depletion): विशेषकर अंटार्कटिका में, भंवर के भीतर अत्यधिक ठंड ‘ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों’ (PSCs) का निर्माण करती है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
  • वैश्विक मौसम में बदलाव: इसके कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की तीव्रता बदल जाती है, जिससे भारत जैसे देशों में सर्दियों की वर्षा का पैटर्न प्रभावित होता है।
  • आर्थिक व मानवीय प्रभाव: बिजली ग्रिड का फेल होना, पाइपलाइनों का जमना, फसलों की बर्बादी और परिवहन प्रणालियों का ठप होना इसके प्रत्यक्ष आर्थिक परिणाम हैं।

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