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ओडिशा का बौद्ध डायमंड ट्रायंगल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल (Odisha Buddhist Diamond Triangle included in the tentative list of UNESCO World Heritage Sites) | UPSC

Odisha Buddhist Diamond Triangle included in the tentative list of UNESCO World Heritage Sites

Odisha Buddhist Diamond Triangle included in the tentative list of UNESCO World Heritage Sites

संदर्भ:

हाल ही में ओडिशा के प्रसिद्ध बौद्ध डायमंड ट्रायंगल’ (हीरक त्रिभुज) स्थल को UNESCO की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा दिसंबर 2025 में भेजे गए प्रस्ताव को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है, जो ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। 

ओडिशा का हीरक त्रिभुज: 

यह तीन प्रमुख बौद्ध विहारों का समूह है जो ओडिशा के जाजपुर और कटक जिलों में स्थित है। इन स्थलों को “डायमंड ट्रायंगल” इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा (Diamond Vehicle) के प्रमुख केंद्र रहे हैं। 

  1. ललितगिरि (Lalitgiri) 
  • ऐतिहासिक महत्व: यह इस त्रिभुज का सबसे प्राचीन स्थल है, जिसकी स्थापना ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के आसपास मानी जाती है।
  • मुख्य विशेषताएं: यहाँ खुदाई में एक विशाल स्तूप मिला है, जिसके भीतर पत्थर की मंजूषा (casket) में भगवान बुद्ध के अवशेष (relics) प्राप्त हुए थे।
  • स्थापत्य: यहाँ महास्तूप, चैत्यगृह और कई मठों के अवशेष मिले हैं। प्रधानमंत्री ने यहाँ एक अत्याधुनिक संग्रहालय का उद्घाटन भी किया था। 
  1. रत्नगिरि (Ratnagiri) 
  • वज्रयान का केंद्र: यह स्थल 5वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बौद्ध दर्शन और कला का मुख्य केंद्र था।
  • कला और नक्काशी: रत्नगिरि अपने शानदार नक्काशीदार प्रवेश द्वारों (Monastery Doors) और भगवान बुद्ध की विशाल मूर्तियों (Colossal Buddha heads) के लिए जाना जाता है।
  • अद्वितीय विशेषता: यहाँ भारत का एकमात्र ऐसा बौद्ध मठ है जिसकी छत वक्राकार (curvilinear) है। 
  1. उदयगिरि (Udayagiri) 
  • भौगोलिक स्थिति: ‘उदयगिरि’ का अर्थ है ‘उगते सूर्य की पहाड़ी’।
  • बौद्ध कला: यहाँ दो प्रमुख मठ (माधवपुरा महाविहार और सिंहप्रस्थ महाविहार) स्थित हैं। खुदाई में यहाँ कई शिलालेख, सीढ़ीदार कुएं और बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा वाली मूर्तियां मिली हैं। 

विशेषताएं

  • बौद्ध धर्म का विकास: ये स्थल बौद्ध धर्म के तीन मुख्य चरणों— हीनयान, महायान और वज्रयान—के क्रमिक विकास को दर्शाते हैं।
  • पुष्पगिरि विश्वविद्यालय: कई इतिहासकारों का मानना है कि ये स्थल मिलकर प्राचीन पुष्पगिरि विश्वविद्यालय का हिस्सा थे, जिसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने अपने यात्रा वृतांत में किया है।
  • राजवंशों का संरक्षण: इन केंद्रों को विशेष रूप से भौमकर राजवंश के शासकों का संरक्षण प्राप्त था, जिन्होंने ओडिशा में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • नदी तंत्र: ये स्थल ब्राह्मणी और विरूपा नदी प्रणालियों के पास स्थित हैं, जो उस समय के व्यापारिक और सांस्कृतिक मार्गों के महत्व को दर्शाते हैं। 

महत्व:

किसी भी स्थल का अस्थायी सूची में शामिल होना, उसके विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) बनने की दिशा में अनिवार्य पहला कदम है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, अनुसंधान के नए अवसर खुलेंगे और संरक्षण के लिए वैश्विक धन और विशेषज्ञता प्राप्त होगी। 

वर्तमान स्थिति: 

वर्तमान में भारत के लगभग 70 स्थल यूनेस्को की अस्थायी सूची में हैं। ओडिशा से भुवनेश्वर का एकाम्र क्षेत्र और चिल्का झील भी इस सूची में शामिल हैं।

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