Fully digital indigenous upgrade of Pechora missile system
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय वायु सेना (IAF) ने अपनी पुरानी सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) पेचोरा मिसाइल प्रणाली का स्वदेशी रूप से पूर्ण डिजिटल अपग्रेड सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
पेचोरा मिसाइल प्रणाली:
- पेचोरा मिसाइल प्रणाली, जिसे S-125 नेवा/पेचोरा के रूप में जाना जाता है, सोवियत संघ मूल की एक मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है।
- भारतीय वायु सेना में इसे 1970 के दशक में शामिल किया गया था। दशकों तक इसने भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन पुरानी एनालॉग तकनीक के कारण इसके आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई।
स्वदेशी अपग्रेड:
- इस पुराने प्लेटफॉर्म को आधुनिक बनाने की जिम्मेदारी बेंगलुरु स्थित निजी रक्षा कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADTL) को सौंपी गई थी।
- परीक्षण: पूरी तरह से अपग्रेड की गई पहली प्रणाली के यूजर ट्रायल पोखरण रेंज में नवंबर और दिसंबर 2025 के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।
प्रमुख तकनीकी सुधार और विशेषताएं:
- डिजिटल रडार: पुराने वैक्यूम ट्यूब और ट्रांजिस्टर आधारित रिसीवर चेन को आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स और डिजिटल रडार ट्रांसमीटरों से बदल दिया गया है।
- आधुनिक ऑपरेटर केबिन: ऑपरेटर केबिन को अत्याधुनिक डिस्प्ले, डेटा संग्रह और हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस किया गया है, जिससे क्रू सदस्यों की संख्या में भी कमी आई है।
- मारने की सटीकता (Kill Probability): अपग्रेड के बाद इसकी सटीकता लगभग 92% तक बढ़ गई है।
- रेंज और ऊंचाई: यह प्रणाली 30 से 35.4 किलोमीटर की रेंज में 100 मीटर से 18-20 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
- विविध खतरों से सुरक्षा: यह अब ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और उच्च गति वाले लड़ाकू विमानों जैसे आधुनिक खतरों से निपटने के लिए तैयार है।
सामरिक महत्व:
- मिशन सुदर्शन चक्र: अपग्रेड की गई पेचोरा प्रणाली भारत के महत्वाकांक्षी मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा होगी, जिसका उद्देश्य एक एकीकृत और बहु-स्तरीय वायु रक्षा कवच तैयार करना है।
- लागत प्रभावी समाधान: नई मिसाइल प्रणालियों को खरीदने की तुलना में पुरानी प्रणालियों का अपग्रेड करना काफी किफायती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और उपकरणों का जीवनकाल बढ़ जाता है।
- नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर: यह प्रणाली अब वायु सेना के IACCS (एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली) नेटवर्क के साथ पूरी तरह से जुड़ सकती है, जिससे रीयल-टाइम डेटा साझा करना संभव होगा।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: यह परियोजना रक्षा निर्माण में निजी भारतीय कंपनियों की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है, जो पहले केवल सार्वजनिक क्षेत्र (जैसे BEL) तक सीमित थी।

