First Global Big Cats Summit held in India

संदर्भ:
भारत वर्ष 2026 में नई दिल्ली में पहले वैश्विक बिग कैट्स शिखर सम्मेलन (First Global Big Cats Summit) की मेजबानी करने जा रहा है। जिसकी आधिकारिक घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ब्राजील में COP30 के दौरान की थी और हाल ही में केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे पुनः रेखांकित किया।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख बिंदु:
- आयोजन और मेजबान: यह शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित होगा।
- प्रजातियों पर ध्यान: इसमें 7 बड़ी बिल्लियों—बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा—के संरक्षण पर चर्चा होगी।
- लक्ष्य: 95 ‘रेंज’ देशों को एक मंच पर लाना, वैज्ञानिक ज्ञान साझा करना, और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना।
- IBCA: यह आयोजन भारत के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के तत्वावधान में किया जाएगा।
- जलवायु संबंध: सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि बिग कैट्स के आवासों का संरक्षण कार्बन पृथक्करण और जलसंभर सुरक्षा में कैसे मदद करता है।
इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) का महत्व:
- शुरुआत: भारत ने 9 अप्रैल 2023 को ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर IBCA की शुरुआत की थी।
- मुख्यालय: इसका मुख्यालय भारत में स्थित है और यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया है।
- संरचना: इसमें सदस्यों की सभा, एक स्थायी समिति और एक सचिवालय शामिल है।
- वित्तीय सहायता: भारत सरकार ने पांच वर्षों (2023-28) के लिए ₹150 करोड़ की सहायता का वादा किया है।
भारत में बिग कैट्स की स्थिति:
- भारत वर्तमान में IBCA द्वारा मान्यता प्राप्त 7 में से 5 प्रजातियों का घर है।
- बाघ (Tiger): विश्व की 75% आबादी (लगभग 3,682), मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड
- एशियाई शेर (Asiatic Lion): एकमात्र निवास स्थान; संख्या 891 (2025), गिर क्षेत्र, गुजरात
- तेंदुआ (Leopard): लगभग 13,874 की आबादी, मध्य प्रदेश सबसे ऊपर
- हिम तेंदुआ (Snow Leopard): लगभग 718 (2024 डेटा), लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड
- चीता (Cheetah): ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत पुनर्वासित (कुल 27), कूनो नेशनल पार्क, MP
(नोट: जगुआर और प्यूमा भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते हैं)
चुनौतियां:
- पर्यावास का नुकसान: शहरीकरण और खनन गतिविधियों के कारण गलियारों (Corridors) का टूटना।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: सुरक्षित क्षेत्रों के बाहर बढ़ती आबादी के कारण संघर्ष में वृद्धि।
- अवैध शिकार: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अंगों और खाल की अवैध तस्करी।
- जलवायु परिवर्तन: विशेषकर हिम तेंदुओं के लिए उच्च पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र का खतरा।
