India Semiconductor Mission 2.0 announced
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के शुभारंभ की घोषणा की है। यह मिशन भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक “नेट एक्सपोर्टर” और “इनोवेशन हब” बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) क्या हैं?
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- ISM एक विशिष्ट और स्वायत्त व्यापार इकाई (Business Division) है, जिसे भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
- यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
- प्रमुख घटक:
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- सेमीकंडक्टर फैब्स (Semiconductor Fabs): सिलिकॉन-आधारित चिप निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता।
- डिस्प्ले फैब्स (Display Fabs): एलसीडी (LCD) और एमोलेड (AMOLED) डिस्प्ले पैनल के निर्माण को प्रोत्साहन।
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर (Compound Semiconductors): इसमें ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) सुविधाओं के लिए सहायता शामिल है।
- डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI): घरेलू स्टार्टअप्स को चिप डिजाइन और IP विकास हेतु प्रोत्साहन देना।
ISM 2.0: प्रमुख विशेषताएँ:
- लक्ष्य: ISM 2.0 का प्राथमिक लक्ष्य केवल विनिर्माण (Manufacturing) तक सीमित न रहकर संपूर्ण इकोसिस्टम-ड्रिवन दृष्टिकोण अपनाना है।
- सप्लाई चेन मजबूती: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक स्वतंत्र और विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सुनिश्चित करना।
- विस्तारित कार्यक्षेत्र: इसमें सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और संपूर्ण भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Indian IP) के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- बजट और वित्तीय प्रोत्साहन: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के बजट को ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है।
- अनुसंधान और कौशल विकास: उद्योग-आधारित अनुसंधान और 85,000 “चिप-रेडी” इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
ISM 1.0 बनाम ISM 2.0:
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ISM 1.0 (2021) |
ISM 2.0 (2026) |
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मुख्य फोकस |
फैब्रिकेशन (Fabs) और असेंबली (ATMP) |
उपकरण, सामग्री, और पूर्ण-स्टैक भारतीय IP |
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दृष्टिकोण |
बुनियादी निवेश और प्रोजेक्ट मंजूरी |
कार्यान्वयन, स्केल और आरएंडडी (R&D) |
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वित्तीय आउटले |
₹76,000 करोड़ |
विस्तारित (प्रस्तावित निवेश लगभग $20 बिलियन) |
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लक्ष्य |
आयात निर्भरता कम करना |
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनना |
रणनीतिक महत्व:
- आर्थिक संप्रभुता: भारत वर्तमान में अपनी चिप जरूरतों का 90-95% आयात करता है। ISM 2.0 इस निर्भरता को कम कर विदेशी मुद्रा बचाएगा।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: स्वदेशी IP डिजाइन करने से रक्षा और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत की सुरक्षा और गोपनीयता मजबूत होगी।
- रोजगार सृजन: इस मिशन से उच्च-तकनीकी विनिर्माण और डिजाइन क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

