Sacred Devnimori Relics of Lord Buddha
संदर्भ:
हाल ही में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका के कोलंबो स्थित ऐतिहासिक गंगारामया मंदिर में प्रदर्शित किया गया।
आयोजन का विवरण:
- भारत सरकार और श्रीलंका के बीच हुए समझौते के तहत इन अवशेषों को एक सप्ताह के विशेष प्रदर्शन के लिए भेजा गया है।
- तिथि: 4 फरवरी से 11 फरवरी 2026।
- स्थान: कोलंबो का प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर।
- प्रतिनिधिमंडल: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक दल अवशेषों के साथ गया है।
- सम्मान: अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान (C-130) से पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ ले जाया गया है।
देवनीमोरी अवशेष क्या हैं?
- स्थान: देवनीमोरी एक महत्वपूर्ण बौद्ध पुरातात्विक स्थल है जो गुजरात के अरावली जिले में शामलाजी के पास स्थित है।
- खोज: इन अवशेषों की खोज 1962-63 में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) के पुरातत्व विभाग द्वारा की गई थी।
- अभिलेखीय साक्ष्य: उत्खनन के दौरान एक ‘महास्तूप’ से पत्थर का एक मंजूषा प्राप्त हुआ था। इस पर ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में “दशबल शरीर निलय” अंकित है, जिसका अर्थ है ‘बुद्ध के शारीरिक अवशेषों का निवास’।
- अवशेष की प्रकृति: इस मंजूषा के भीतर एक तांबे का बक्सा था, जिसमें रेशमी कपड़े और मोतियों के साथ भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियां सुरक्षित थीं। वर्तमान में ये अवशेष MSU बड़ौदा में संरक्षित हैं।
गंगारामया मंदिर का महत्व:
- कोलंबो (श्रीलंका) स्थित गंगारामया मंदिर एक धार्मिक स्थल है, यह श्रीलंका की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत का केंद्र है।
- इसे 19वीं सदी के अंत में वेन हिक्कादुवे श्री सुमंगला नायक थेरा द्वारा स्थापित किया गया था।
- यह मंदिर भारतीय, श्रीलंकाई, थाई और चीनी वास्तुकला शैली का अद्भुत मिश्रण है।
- यह कोलंबो की प्रसिद्ध ‘बेइरा झील’ के तट पर स्थित है।
- यहाँ विश्वभर से प्राप्त अमूल्य बौद्ध प्रतिमाएं और पांडुलिपियां संरक्षित हैं।
- यह मंदिर प्रतिवर्ष ‘नवाम पेराहेरा’ उत्सव के लिए प्रसिद्ध है, जो श्रीलंका की जीवंत परंपराओं को दर्शाता है।

