End of President rule in Manipur
संदर्भ:
मणिपुर में लगभग एक वर्ष के अंतराल के बाद 4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने की घोषणा की, जिसके तुरंत बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
मणिपुर में संवैधानिक संकट और राष्ट्रपति शासन:
- न्यायिक हस्तक्षेप: 27 मार्च 2023 को मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की सिफारिश पर विचार करने का निर्देश दिया।
- हिंसा: इसके कुछ समय बाद 3 मई 2023 को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद मैतेई और कुकी–ज़ो समुदायों के बीच व्यापक जातीय संघर्ष शुरू हुआ। कुकी समुदाय को डर है कि इससे उनकी नौकरियों और पहाड़ी भूमि पर मैतेई लोगों का अधिकार हो जाएगा।
- मणिपुर की 53% जनसंख्या मैतेई है, जो मुख्य रूप से राज्य के 10% घाटी क्षेत्र में रहती है। शेष 47% जनसंख्या (कुकी और नागा) राज्य के 90% पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है।
- अनुच्छेद 355 का क्रियान्वयन: केंद्र सरकार ने राज्य की सुरक्षा स्थिति को संभालने के लिए अनुच्छेद 355 को सक्रिय किया (जो केंद्र को आंतरिक अशांति से राज्य की रक्षा करने का अधिकार देता है)।
- समितियों का गठन: शांति के लिए केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति अजय लांबा आयोग और राहत कार्यों के लिए न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति (सर्वोच्च न्यायालय द्वारा) का गठन किया।
- प्रशासनिक विफलता: लंबे समय तक अस्थिरता के कारण नागरिक प्रशासन और सुरक्षा तंत्र के बीच समन्वय का अभाव देखा गया। राज्य प्रशासन कानून-व्यवस्था बहाल करने में विफल रहा।
- राष्ट्रपति शासन: 13 फरवरी 2025 को “संवैधानिक तंत्र की विफलता” के आधार पर अनुच्छेद 356 लागू किया गया। इसमें विधानसभा को भंग करने के बजाय ‘निलंबित एनीमेशन’ में रखा गया।
- संसदीय अनुमोदन: राष्ट्रपति शासन को अगस्त 2025 में संसद द्वारा आगामी 6 महीनों के लिए विस्तारित किया गया।
- समाप्ति: 4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ने शासन हटाने की अधिसूचना जारी की।
- जिसके बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। साथ ही नेमचा किपजेन, मणिपुर की पहली महिला कुकी उपमुख्यमंत्री और लोसी दिखो, नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले उपमुख्यमंत्री बने।
राष्ट्रपति शासन के बारे में:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) का प्रावधान है, जिसे राज्य में ‘संवैधानिक तंत्र की विफलता’ कहा जाता है।
- लागू करने के कारण:
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- अनुच्छेद 356: जब राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्य माध्यम से राष्ट्रपति को विश्वास हो जाए कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकता।
- अनुच्छेद 365: यदि राज्य केंद्र द्वारा दिए गए संवैधानिक निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है।
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- लागू करने की प्रक्रिया:
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- संसदीय अनुमोदन: राष्ट्रपति की उद्घोषणा को 2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से अनुमोदित होना चाहिए।
- अवधि: अनुमोदन के बाद यह 6 महीने तक प्रभावी रहता है। इसे अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है (प्रत्येक 6 माह में अनुमोदन आवश्यक)।
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- प्रभाव:
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- कार्यकारी: राष्ट्रपति राज्य मंत्रिपरिषद को भंग कर देते हैं। राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में प्रशासन संभालते हैं।
- विधायी: राज्य विधानसभा या तो भंग कर दी जाती है या निलंबित। राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति संसद के पास चली जाती है।
- न्यायिक: उच्च न्यायालय की शक्तियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- संवैधानिक सुरक्षा (S.R. बोम्मई केस, 1994): सर्वोच्च न्यायालय ने इसे न्यायिक समीक्षा के अधीन रखा है ताकि केंद्र द्वारा इसका राजनीतिक दुरुपयोग न हो सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विधानसभा का बहुमत केवल सदन के पटल पर तय होना चाहिए।
भारत में राष्ट्रपति शासन:
- भारत में अब तक 125 से अधिक बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है।
- सर्वाधिक बार: मणिपुर (11 बार) और उत्तर प्रदेश (10 बार)।
- स्वतंत्र भारत में पहली बार राष्ट्रपति शासन 1951 में पंजाब में लागू किया गया था।
- छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में अब तक राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया गया है।

