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सरकार ने फेफड़ों के कैंसर की देखभाल के लिए प्रथम राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए (Government releases first national guidelines for lung cancer care) | UPSC Preparation

Government releases first national guidelines for lung cancer care

Government releases first national guidelines for lung cancer care

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने फेफड़ों के कैंसर के प्रबंधन के लिए देश की पहली राष्ट्रीय और साक्ष्य-आधारित गाइडलाइन्स जारी की हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में इसका विमोचन किया।  

फेफड़ों के कैंसर प्रबंधन के लिए पहली राष्ट्रीय और साक्ष्य-आधारित गाइडलाइन्स:

  • विकास प्रक्रिया: इन दिशानिर्देशों को स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्टों के सहयोग से विकसित किया गया है। इसमें PICO (Population, Intervention, Comparator, Outcome) पद्धति का उपयोग किया गया है।
  • 15 साक्ष्य-आधारित सिफारिशें: इस दस्तावेज़ में निदान (Diagnosis), उपचार के चरणों और उपशमन देखभाल से संबंधित 15 महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल हैं।
  • स्वदेशी दृष्टिकोण: भारत पश्चिमी मॉडलों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बीमारियों के बोझ और संसाधनों के अनुरूप स्वदेशी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में समानता: ये दिशानिर्देश सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य प्रणालियों पर समान रूप से लागू होंगे, जिससे देशभर में इलाज की गुणवत्ता में विषमता कम होगी।
  • सरल भाषा का सारांश: रोगियों और उनके परिवारों की सुविधा के लिए एक आसान सारांश भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे अपने उपचार विकल्पों को बेहतर ढंग से समझ सकें। 
  • पेलिएटिव केयर (Palliative Care): इन गाइडलाइन्स में ‘पेलिएटिव केयर’ को उपचार का अनिवार्य हिस्सा माना गया है। इसमें केवल जीवित रहने (Survival) पर ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life), दर्द प्रबंधन और मनोवैज्ञानिक सहायता पर भी जोर दिया गया है। 

भारत में फेफड़ों के कैंसर की वर्तमान स्थिति:

  • बढ़ता प्रकोप: ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामले 2025 तक 81,219 से अधिक होने का अनुमान है।
  • मृत्यु दर: यह पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। भारत में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में इसका योगदान लगभग 10% है।
  • देर से निदान: लगभग 70-80% मामले एडवांस स्टेज (तीसरी या चौथी अवस्था) में पाए जाते हैं, जिससे ‘सर्वाइवल रेट’ काफी कम हो जाता है।
  • बदलते जोखिम कारक: हालांकि तंबाकू मुख्य कारण है, लेकिन अब वायु प्रदूषण (Air Pollution) और ‘पैसिव स्मोकिंग’ के कारण गैर-धूम्रपान करने वालों (Non-smokers) में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

सरकार की प्रमुख पहलें:

  • राष्ट्रीय कैंसर सहायता कार्यक्रम (NP-NCD): National Programme for Prevention & Control of NCDs के तहत बुनियादी ढांचे, जनशक्ति विकास और शीघ्र निदान पर जोर दिया जा रहा है।
  • आयुष्मान भारत (PM-JAY): Ayushman Bharat के तहत कैंसर के इलाज (कीमोथेरेपी और सर्जरी) के लिए ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जाता है।
  • PM-BJAK (जन औषधि केंद्र): सस्ती कैंसर रोधी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र’ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI): झज्जर (हरियाणा) और कोलकाता में समर्पित कैंसर संस्थानों की स्थापना की गई है।

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