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India-US Interim Trade Framework

India-US Interim Trade Framework

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संदर्भ:

7 फरवरी, 2026 को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘अंतरिम व्यापार ढांचे’ (Interim Trade Framework) की घोषणा की, जो दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में एक निर्णायक कदम है। 

India-US Interim Trade Framework के मुख्य बिंदु:

    • टैरिफ में बड़ी कटौती: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है।
      • अगस्त 2025 में रूसी तेल खरीद के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क अब हटा लिया गया है।
      • 18 प्रतिशत लागू करेगा- टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर व फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी शामिल हैं।
    • क्षेत्रीय पहुंच: भारत ने अमेरिका से अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की योजना बनाई है, जिसमें शामिल हैं:
      • ऊर्जा: कच्चे तेल, LNG और कोकिंग कोल का आयात।
      • रक्षा और विमानन: विमान और उनके पुर्जे।
      • प्रौद्योगिकी: सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर से संबंधित तकनीक। 
    • शून्य शुल्क (Zero Tariff): जेनेरिक दवाओं, Dried distillers’ grains (DDGs), पशु चारा के लिए लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट, सोयाबीन तेल और विमान के कल-पुर्जों पर टैरिफ को घटाकर 0% करने का लक्ष्य रखा गया है।
    • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: भारत ने स्पष्ट किया है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं किया गया है, ताकि भारतीय किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
  • डिजिटल व्यापार: भारत और अमेरिका अब “डिजिटल व्यापार नियमों” (Digital Trade Rules) को परिभाषित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
      • बाधाओं को दूर करना: दोनों देश भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं (Discriminatory Practices) को खत्म करने पर सहमत हुए हैं जो सीमा पार डेटा प्रवाह या डिजिटल सेवाओं में बाधा डालती हैं।
      • प्रौद्योगिकी सहयोग: समझौते के तहत GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले उन्नत उपकरणों के व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा।
      • आपूर्ति श्रृंखला: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए दोनों देश ‘गैर-बाजार नीतियों’ के खिलाफ एकजुट होंगे।
  • अन्य शर्ते
    • अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद अमेरिका कई भारतीय उत्पादों पर Reciprocal Tariff हटाएगा, जिनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न-आभूषण और विमान के पुर्जे शामिल हैं।
    • अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमान और विमान पुर्जों, साथ ही एल्यूमिनियम, स्टील और कॉपर पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित टैरिफ को हटाएगा।
    • तकनीकी नियमों और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए दोनों देश Conformity Assessment Procedures पर चर्चा करेंगे।
    • भारत को ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए प्रेफरेंशियल टैरिफ कोटा मिलेगा। 

आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव:

  • निर्यात को बढ़ावा: कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए अमेरिकी बाजार अब अधिक सुलभ होगा।
  • IT और सेवा क्षेत्र: डिजिटल व्यापार नियमों में स्पष्टता से भारतीय IT कंपनियों को अमेरिकी डेटा बाजार में अधिक सुरक्षा और अवसर मिलेंगे।
  • ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC): यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
  • iCET का विस्तार: यह समझौता ‘महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल’ (iCET) के उद्देश्यों को व्यापारिक धरातल पर उतारता है।
  • चीन पर निर्भरता कम करना: सेमीकंडक्टर और डेटा सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका के साथ जुड़ना भारत की तकनीकी संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती: टैरिफ विवादों को सुलझाकर दोनों देश अब “व्यापक आर्थिक साझेदारी” की ओर बढ़ रहे हैं।

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