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दुर्लभ इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS में जटिल कार्बनिक अणुओं की खोज (Discovery of complex organic molecules in the rare interstellar comet 3I/ATLAS) | UPSC Preparation

Discovery of complex organic molecules in the rare interstellar comet 3I/ATLAS

Discovery of complex organic molecules in the rare interstellar comet 3I/ATLAS

संदर्भ:

हाल ही में नासा के SPHEREx मिशन ने सौरमंडल के बाहर से आए एक दुर्लभ इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS में जटिल कार्बनिक अणुओं (Organic Molecules) की उपस्थिति का पता लगाया है। 

इंटरस्टेलर धूमकेतु में कार्बनिक अणुओं की खोज:

  • इंटरस्टेलर धूमकेतु: धूमकेतु 3I/ATLAS हमारे सौरमंडल में प्रवेश करने वाला अब तक का ज्ञात तीसरा इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट है (ओमुआमुआ और 2I/बोरिसोव के बाद)। इसकी खोज जुलाई 2025 में की गई थी।
  • जटिल कार्बनिक अणु: शोधकर्ताओं ने इसमें मेथनॉल (Methanol), साइनाइड (Cyanide), और मीथेन (Methane) जैसे अणुओं का पता लगाया है। ये अणु पृथ्वी पर जीवन के लिए बुनियादी गैस मानी जाती हैं।
  • सब्लिमेशन प्रक्रिया (Sublimation): सूर्य की गर्मी के कारण धूमकेतु की जमी हुई बर्फ सीधे गैस में बदल गई (ऊर्ध्वपातन), जिससे इसके भीतर छिपे अरबों साल पुराने पदार्थ बाहर निकल आए।
  • ब्राइटनिंग (Brightening): दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच, इस धूमकेतु की चमक में अचानक वृद्धि देखी गई, जो इसके भीतर से कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प के भारी उत्सर्जन को दर्शाती है।
  • सबसर्फेस सामग्री: वैज्ञानिकों का मानना है कि जो कार्बनिक पदार्थ मिले हैं, वे इस धूमकेतु की सतह के नीचे जमे हुए थे और अंतरिक्ष विकिरण (Cosmic Rays) से सुरक्षित थे।

खोज के निहितार्थ:

  • पैनस्पर्मिया परिकल्पना: ​यह खोज इस सिद्धांत को मजबूती देती है कि जीवन के लिए आवश्यक घटक (Organic Molecules) ब्रह्मांड में हर जगह मौजूद हैं और धूमकेतुओं के माध्यम से एक सौरमंडल से दूसरे सौरमंडल तक पहुँच सकते हैं।

  • ​अंतरतारकीय रसायन विज्ञान: ​सौरमंडल के बाहर से आए इस पिंड की संरचना हमारे सौरमंडल के धूमकेतुओं के समान है। यह इंगित करता है कि अन्य तारा प्रणालियों में भी ग्रह निर्माण की प्रक्रिया वैसी ही हो सकती है जैसी हमारे यहाँ हुई थी।

  • ​भविष्य के मिशनों के लिए मार्ग प्रशस्त करना: ​SPHEREx का डेटा यह समझने में मदद करेगा कि भविष्य में इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट्स को पकड़ने या उनसे सैंपल लेने के लिए किस प्रकार के ‘इंटरसेप्टर मिशन’ भेजे जाने चाहिए।

SPHEREx मिशन:

  • परिचय: SPHEREx (Spectro-Photometer for the History of the Universe, Epoch of Reionization and Ices Explorer) नासा का एक खगोलीय मिशन है जिसे ब्रह्मांड के इतिहास और जीवन के आधारभूत तत्वों की खोज के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • लॉन्च: इसे 11 मार्च, 2025 को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • कार्य: यह इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके पूरे आकाश का मानचित्रण करता है। यह आकाश को 102 रंगों (वेवलेंथ) में देखने में सक्षम है, जो किसी भी अन्य मिशन की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत है। 
  • स्पेक्ट्रोस्कोपी: यह तकनीक प्रकाश को उसके घटक रंगों में तोड़कर यह बताती है कि कोई खगोलीय पिंड किन तत्वों (जैसे पानी, कार्बन डाइऑक्साइड, या जटिल अणु) से बना है।
  • मिशन लक्ष्य:
    • ​ब्रह्मांड के विस्तार (Inflation) के साक्ष्यों की खोज करना।
    • ​आकाशगंगाओं के निर्माण और विकास के इतिहास का अध्ययन करना।
    • ​मिल्की वे के भीतर ‘बायोजेनिक अणुओं’ (जीवन के आधारभूत अणु) की खोज करना।

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