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भारत की इन-ऑर्बिट स्नूपिंग क्षमता में बड़ी उपलब्धि (Major breakthrough in India in-orbit snooping capability) | UPSC

Major breakthrough in India in-orbit snooping capability

Major breakthrough in India in-orbit snooping capability

संदर्भ:

हाल ही में अहमदाबाद स्थित निजी कंपनी अज़िस्टा इंडस्ट्रीज (Azista Industries) ने अंतरिक्ष में एक उपग्रह से दूसरे उपग्रह की इमेजिंग करने की क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। फरवरी, 2026 को किए गए इस प्रयोग में अज़िस्टा के ABA फर्स्ट रनर (AFR) उपग्रह ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें लीं। 

इसे तकनीकी भाषा में “इन-ऑर्बिट स्नूपिंग” (In-orbit snooping) या “स्पेस वॉच” कहा जाता है, जो भारत की अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness – SSA) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness – SSA):

  • अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness – SSA) अंतरिक्ष पर्यावरण की व्यापक समझ और अंतरिक्ष संपत्तियों (उपग्रहों) को खतरों से बचाने की क्षमता है। 
  • यह मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है: 
    • अंतरिक्ष निगरानी और ट्रैकिंग (SST): मानव निर्मित वस्तुओं, जैसे निष्क्रिय उपग्रहों और मलबे (Space Debris) को ट्रैक करना।
    • अंतरिक्ष मौसम (Space Weather): सौर विकिरण और ऊर्जा प्रवाह की निगरानी करना जो इलेक्ट्रॉनिक्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
    • निकट-पृथ्वी वस्तुएं (NEO): पृथ्वी के करीब आने वाले प्राकृतिक पिंडों (क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं) का पता लगाना। 

इसरो (ISRO) की प्रगति:

    • प्रोजेक्ट नेत्रा (Project NETRA): यह भारत का एक प्रारंभिक चेतावनी तंत्र (Early Warning System) है। इसके तहत 10 सेमी जितनी छोटी वस्तुओं को 3,400 किमी की दूरी तक ट्रैक करने के लिए रडार और टेलीस्कोप का नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है।
      • लक्ष्य: भविष्य में 36,000 किमी (GEO ऑर्बिट) तक की निगरानी क्षमता हासिल करना। 
  • IS4OM (ISRO System for Safe & Sustainable Operations Management): जुलाई 2022 में बेंगलुरु में समर्पित IS4OM केंद्र की स्थापना की गई। यह केंद्र टकराव से बचने (Collision Avoidance), मलबा प्रबंधन और पुन: प्रवेश (Re-entry) विश्लेषण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। 
  • हालिया उपलब्धियां: 
    • टक्कर से बचाव (CAM): 2024 में इसरो ने अपने उपग्रहों को मलबे से बचाने के लिए 10 टक्कर बचाव युद्धाभ्यास (CAM) सफलतापूर्वक किए।
    • मलबे से मुक्त अंतरिक्ष: इसरो ने 2030 तक सभी भारतीय मिशनों को ‘मलबा मुक्त’ (Debris Free Space Missions – DFSM) बनाने का संकल्प लिया है।
    • SPADEX मिशन: जनवरी 2025 में, इसरो ने SPADEX (Space Docking Experiment) के माध्यम से स्वायत्त डॉकिंग क्षमता का प्रदर्शन किया, जो इन-ऑर्बिट सर्विसिंग के लिए महत्वपूर्ण है। 
  • वैश्विक सहयोग: भारत वर्तमान में बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता (LTS) पर संयुक्त राष्ट्र (UN) कार्य समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इसरो अमेरिकी अंतरिक्ष कमान (USSPACECOM) जैसे निकायों के साथ डेटा साझा करने के लिए समझौते कर रहा है। 

इन-ऑर्बिट जासूसी का महत्व:

  • रक्षा और सुरक्षा: यह क्षमता भारत को दुश्मन देशों के जासूसी उपग्रहों (Spy Satellites) पर नजर रखने और उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने की शक्ति देती है।
  • मिसाइल ट्रैकिंग: विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में बैलिस्टिक मिसाइलों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग में सहायक होगी, जिससे भारत की ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) मजबूत होगी।
  • मलबे से सुरक्षा: अंतरिक्ष में बढ़ रहे कचरे (Space Debris) से भारतीय संपत्तियों (सैटलाइट्स) को बचाने के लिए सटीक ट्रैकिंग अनिवार्य है।

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