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जम्मू कश्मीर का सार्थल विंटर फेस्टिवल (Sarthal Winter Festival) | UPSC Preparation

Sarthal Winter Festival

Sarthal Winter Festival

संदर्भ:

हाल ही में जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले की सार्थल घाटी में दूसरे ‘सार्थल विंटर फेस्टिवल’ (Sarthal Winter Festival) का सफल आयोजन किया गया।

सार्थल विंटर फेस्टिवल के बारे मे:

  • आध्यात्मिक आधार: सार्थल विंटर फेस्टिवल का सांस्कृतिक महत्व माता सार्थल देवी के मंदिर से गहराई से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, माता सार्थल देवी को शारिका देवी (श्रीनगर की कुलदेवी) का ही एक स्वरूप माना जाता है।
    • उद्घाटन और पदयात्रा: उत्सव की शुरुआत आमतौर पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों (जैसे ढोल और नगाड़े) की थाप पर एक छोटी पदयात्रा से होती है।
    • सांस्कृतिक मंच: एक मुख्य मंच तैयार किया जाता है जहाँ कठुआ, बनी और बसोहली के स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
    • प्रदर्शनी और बाजार: विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा स्टाल लगाए जाते हैं जो क्षेत्र की स्वदेशी तकनीकों और उत्पादों (जैसे बसोहली पश्मीना) का प्रदर्शन करते हैं।
  • लोक नृत्य: 
  • कुद (Kud) नृत्य: यह इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य है। यह उत्सव के दौरान देवताओं को प्रसन्न करने के उपलक्ष्य में किया जाता है। पुरुष एक घेरे में पारंपरिक वेशभूषा पहनकर बांसुरी और ढोल की धुन पर नाचते हैं।
  • गीतरु (Geetru): यह एक गायन सह नृत्य शैली है जिसमें डोगरा संस्कृति की वीरता और प्रेम की कहानियाँ सुनाई जाती हैं।
  • पारंपरिक संगीत: 
  • बाखां (Bakhan): यह ऊंचे पहाड़ों पर रहने वाले गद्दी और सिप्पी समुदायों द्वारा गाया जाने वाला एक मधुर लोक गीत है। इसमें किसी वाद्ययंत्र की आवश्यकता नहीं होती।
  • आर्थिक प्रभाव: हस्तशिल्प और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों (Pahadi Cuisine) के स्टालों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों और निवासियों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित किए गए।

सार्थल घाटी का भूगोल:

  • अवस्थिति: यह कठुआ जिले के बनी उपमंडल में स्थित है, जो बनी कस्बे से लगभग 35 किमी और लखनपुर (कठुआ का प्रवेश द्वार) से 175 किमी दूर है।
  • ऊंचाई: लगभग 7,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घास का मैदान (Meadow) वर्ष के छह महीने बर्फ से ढका रहता है।
  • प्राकृतिक सौंदर्य: घने देवदार के जंगल, बर्फ से लदी चोटियां और स्वच्छ वातावरण के कारण इसे अक्सर ‘मिनी कश्मीर’ की संज्ञा दी जाती है।
  • रणनीतिक मार्ग: यह घाटी प्रसिद्ध बनी-सार्थल-भद्रवाह ट्रेक मार्ग पर स्थित है, जो साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के लिए उत्कृष्ट है।
  • जल निकासी (Drainage): यह क्षेत्र विशिष्ट है क्योंकि यहाँ चार जलधाराएं विभिन्न पहाड़ों से आकर एक स्थान पर मिलती हैं। यह रवि और उझ नदियों के जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है।
  • कनेक्टिविटी: सार्थल घाटी उत्तर में भद्रवाह (डोडा) और पूर्व में हिमाचल प्रदेश (चंबा) से जुड़ी हुई है। चतरगला दर्रा (Chattergala Pass) इसे भद्रवाह से जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है।
  • पारिस्थितिकी (Flora): यहाँ प्राइमुला डेंटिकुलता (Primula denticulata) और बर्गेनिया सिलियाटा (Bergenia ciliata) जैसी हिमालयी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।

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