Kyasanur Forest Disease
संदर्भ:
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने हाल ही में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD), जिसे ‘मंकी फीवर’ (Monkey Fever) भी कहा जाता है, के लिए एक बेहतर स्वदेशी वैक्सीन के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस नए टीके का चरण-I (Phase-I) मानव नैदानिक परीक्षण शुरू हो चुका है।
- सहयोगात्मक प्रयास: इसे ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) और इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- वैक्सीन का प्रकार: यह एक ‘निष्क्रिय’ (Inactivated) और ‘एडजुवेंटेड’ (Adjuvanted) टीका है। एडजुवेंट का उपयोग शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) को तेज करने के लिए किया जाता है।
- डोज अंतराल: यह दो खुराक वाला टीका है, जिसे 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाएगा।
- स्वदेशी निर्माण: यह पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ है, जो इसे किफायती और स्थानीय उपलब्धता के अनुकूल बनाता है।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) का परिचय:
- परिचय: KFD एक टिक-जनित (Tick-borne) वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो मुख्य रूप से मनुष्यों और बंदरों को प्रभावित करता है।
- खोज: इसकी पहचान पहली बार 1957 में कर्नाटक के शिवमोगा जिले के क्यासानूर जंगलों में हुई थी।
- कारक: यह ‘फ्लैविविरिडे’ (Flaviviridae) परिवार के ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज वायरस’ (KFDV) के कारण होता है।
- प्रसार: यह मुख्य रूप से हार्ड टिक्स (Hemaphysalis spinigera) के काटने या संक्रमित जानवरों (विशेषकर बंदरों) के संपर्क में आने से फैलता है। मानव-से-मानव संचरण नहीं होता है।
- लक्षण: अचानक तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, और गंभीर मामलों में मसूड़ों या पेट से रक्तस्राव। इसकी मृत्यु दर लगभग 3-10% है।
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- उपनाम: इसे ‘मंकी फीवर’ कहा जाता है क्योंकि जंगलों में बंदरों की मृत्यु इस बीमारी के फैलने का प्रारंभिक संकेत होती है।
- भौगोलिक विस्तार: यह बीमारी मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी घाट (Western Ghats) क्षेत्र तक सीमित है:
- प्रभावित राज्य: कर्नाटक (सर्वाधिक), केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र।
- जोखिम समूह: वन विभाग के कर्मचारी, चरवाहे, किसान और वे लोग जो जंगलों के आसपास रहते हैं या काम करते हैं।
- उपचार:
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- कोई विशिष्ट दवा नहीं: वर्तमान में KFD के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है; उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के प्रबंधन पर आधारित है।
- टीकाकरण (Vaccination): भारत में पहले फॉर्मलिन-इनएक्टिवेटेड वैक्सीन उपयोग में ली जा रही है।
- बचाव के उपाय: जंगलों में जाते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनना, टिक रिपेलेंट का उपयोग करना और मृत बंदरों से दूर रहना अनिवार्य है।

