Corruption Perceptions Index 2025
संदर्भ:
हाल ही में वैश्विक गैर-सरकारी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) द्वारा ‘भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025’ जारी किया गया।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) क्या है?
- परिचय: CPI दुनिया भर के देशों में सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) में व्याप्त भ्रष्टाचार के स्तर का एक मापक है। यह विशेषज्ञों और व्यावसायिक लोगों की धारणाओं पर आधारित है।
- संस्था: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (मुख्यालय: बर्लिन, जर्मनी)।
- कार्यप्रणाली: यह सूचकांक 0 से 100 के पैमाने पर आधारित है।
- 0: अत्यधिक भ्रष्ट (Highly Corrupt)
- 100: अत्यंत स्वच्छ (Very Clean)
- स्रोत: इसके लिए विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच (WEF) और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के 13 विभिन्न डेटा स्रोतों का उपयोग किया जाता है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025: मुख्य बिंदु
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- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: डेनमार्क (स्कोर 89) ने अपना प्रथम स्थान बरकरार रखा है, उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर का स्थान है।
- सबसे निचले देश: सोमालिया और दक्षिण सूडान (स्कोर 9) सबसे निचले पायदान पर हैं।
- भारत की स्थिति: 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रैंकिंग और स्कोर में आंशिक सुधार देखा गया है:
- रैंकिंग (Rank): भारत 182 देशों की सूची में 91वें स्थान पर है।
- स्कोर (Score): भारत का स्कोर 39 है (2024 में यह 38 था)।
- तुलनात्मक विश्लेषण: भारत ने 2024 (96वीं रैंक) की तुलना में 5 स्थानों का सुधार किया है। हालांकि, भारत का स्कोर अभी भी वैश्विक औसत (42) से कम है।
- पड़ोसी देशों की स्थिति:
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- चीन: 76वां स्थान
- पाकिस्तान: 136वां स्थान
- बांग्लादेश: 150वां स्थान
- भूटान: 18वां स्थान
- लोकतंत्रों में गिरावट: रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अमेरिका (64), ब्रिटेन (70) और कनाडा (75) जैसे स्थापित लोकतंत्रों के स्कोर में भी पिछले दशक में गिरावट आई है।
- नागरिक स्वतंत्रता: 2025 की रिपोर्ट रेखांकित करती है कि जिन देशों में प्रेस स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध हैं, वहां भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है।
भारत के सन्दर्भ में:
- भ्रष्टाचार और पत्रकारिता: CPI 2025 में भारत को उन देशों में सूचीबद्ध किया गया है जो “भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक” हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 90% से अधिक पत्रकारों की हत्याएं उन देशों में हुई हैं जिनका स्कोर 50 से कम है।
- सुधार के कारण: भारत की रैंकिंग में सुधार के कुछ संभावित प्रशासनिक कारण हो सकते हैं:
- डिजिटलीकरण: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और ई-गवर्नेंस ने बिचौलियों की भूमिका कम की है।
- कानूनी ढांचा: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन) और लोकपाल की सक्रियता।
- GST और फेसलेस असेसमेंट: कर प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से पारदर्शिता बढ़ी है।
- विद्यमान चुनौतियाँ:
- राजनीतिक वित्तपोषण (Political Funding): चुनावी चंदे में पारदर्शिता की कमी अभी भी एक बड़ा मुद्दा है।
- न्यायिक विलंब: भ्रष्टाचार के मामलों में धीमी सुनवाई अपराधियों के मन में डर कम करती है।
- व्हिसलब्लोअर संरक्षण: भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों के लिए सुरक्षा तंत्र का कमजोर होना।
- नीतिगत उपाय:
- संस्थानों को मजबूत करना: सीवीसी (CVC) और सीबीआई (CBI) जैसी संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता देना।
- नागरिक समाज की भूमिका: भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता और एनजीओ की भागीदारी बढ़ाना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स हेवन के खिलाफ वैश्विक संधियों (जैसे UNCAC) का कड़ाई से पालन।
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