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मैंग्रोव क्लैम के कैप्टिव ब्रीडिंग में ICAR की बड़ी सफलता (ICAR achieves major success in captive breeding of mangrove clams) | UPSC

ICAR achieves major success in captive breeding of mangrove clams

ICAR achieves major success in captive breeding of mangrove clams

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के वैज्ञानिकों ने नियंत्रित हैचरी स्थितियों के तहत मैंग्रोव क्लैम (Mangrove Clam) का कैप्टिव ब्रीडिंग (Captive Breeding) और पूर्ण जीवन-चक्र (Full Life-cycle) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

मैंग्रोव क्लैम (Mangrove Clam): 

  • परिचय: मैंग्रोव क्लैम एक द्वि कपाटी (Bivalve Mollusc) है जो मुख्य रूप से मैंग्रोव के कीचड़युक्त इलाकों और मुहाने (Estuaries) में पाया जाता है।
  • आकार और रंग: इसका कवच आमतौर पर गोलाकार या त्रिकोणीय होता है, जिसका रंग गहरा भूरा, काला या जैतून हरा हो सकता है। अंदर की सतह सफेद और चिकनी होती है।
  • स्वभाव: यह एक ‘फिल्टर फीडर’ है। यह पानी को अपने शरीर के माध्यम से छानता है और उसमें मौजूद सूक्ष्म शैवाल (Micro-algae) और कार्बनिक कणों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।
  • प्राकृतिक आवास: ​मैंग्रोव क्लैम मुख्य रूप से मैंग्रोव के दलदली क्षेत्रों, मुहानों पर पाया जाता है। ​ये कीचड़ या रेत के भीतर दबे रहते हैं, जहाँ ज्वार-भाटे (Tides) का पानी नियमित रूप से आता-जाता है।

  • क्षमता: ​इनमें प्रतिकूल परिस्थितियों, जैसे कम ऑक्सीजन और लवणता (Salinity) के उतार-चढ़ाव को सहने की अद्भुत क्षमता होती है।
  • जल शोधक: फिल्टर फीडर होने के नाते, ये पानी से अतिरिक्त पोषक तत्वों और प्रदूषकों को हटाकर जल को साफ रखने में मदद करते हैं।
  • जैव-संकेतक (Bio-indicator): इनकी उपस्थिति और स्वास्थ्य से उस क्षेत्र के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का पता चलता है।
  • भोजन श्रृंखला: ये कई समुद्री जीवों और पक्षियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं।
  • पोषण: इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह आयरन, जिंक, कैल्शियम तथा ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक सस्ता और समृद्ध स्रोत है।

तकनीकी सफलता: 

  • ब्रूडस्टॉक प्रबंधन: प्राकृतिक आवास से स्वस्थ क्लैम एकत्र कर उन्हें नियंत्रित तापमान और लवणता (Salinity) वाली हैचरी में अनुकूलित किया गया।
  • प्रेरित प्रजनन (Induced Breeding): तापीय उत्तेजना (Thermal Stimulation) के माध्यम से क्लैम को अंडे देने के लिए प्रेरित किया गया।
  • लार्वा विकास: निषेचन के बाद, लार्वा के विभिन्न चरणों (ट्रोकोफोर, डी-वेलीगर, और पेदिवेलीगर) को विशिष्ट सूक्ष्म शैवाल (Micro-algae) आहार प्रदान कर विकसित किया गया।
  • सेटलमेंट और मेटामॉर्फोसिस: लार्वा का सफलतापूर्वक वयस्क क्लैम (Spat) में परिवर्तन होना ही इस शोध की सबसे बड़ी सफलता है, क्योंकि प्राकृतिक वातावरण के बाहर यह अत्यंत कठिन होता है।

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